झारखंड कांग्रेस में बड़े बदलाव के संकेत, नए कलेवर पर उतरेगी पार्टी

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में प्रदेश कांग्रेस धीरे-धीरे जनसरोकार के मुद्दों से दूर होती जा रही है। राज्य में पार्टी की ओर से पिछले तीन से अधिक माह से कोई आंदोलन नहीं किया गया है। स्पष्ट तौर पर इन्हीं कारणों से पार्टी जनता से दूर होती जा रही है।

पार्टी के नेताओं के पास उतना ही काम रह गया है जितना केंद्रीय नेतृत्व से निर्देश मिलता है। केंद्रीय टीम के निर्देश पर ही मनरेगा की रक्षा करने को लेकर आखिरी बार राज्य में आंदोलन जनवरी माह में किया गया था।

सभी जिलों और तमाम विधायकों को पार्टी की ओर से आंदोलन को लेकर लक्ष्य दिए गए थे। पिछले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष संगठन के पुनर्गठन के प्रस्ताव को लेकर नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय भी गए थे हालांकि सूत्र बता रहे हैं कि पुनर्गठन का कार्यक्रम 15 दिनों के लिए टाल दिया गया है।

संगठन में बदलाव के आसार

झारखंड में किसी प्रकार का संगठनात्मक बदलाव असम और फिर पश्चिम बंगाल के चुनाव के बाद होने की
बात कही जा रही है। अप्रैल तक इन दो राज्यों में चुनाव संपन्न करा लेने कर बात कही जा रही है। इसके बाद झारखंड में भी संगठन में हेरफर की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

इन संभावनाओं के पीछे सबसे बड़ा तर्क यही है कि पार्टी का जनजुड़ाव कम हो रहा है। हाल में ही संपन्न निकाय चुनावों में कांग्रेस का प्रर्दशन नकारात्मक देखा जा रहा है।

प्रदेश नेतृत्व ने अभी तक हार के कारणों की समीक्षा भी नहीं की है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रांची आकर लौट भी गए हैं। अब झारखंड कांग्रेस की बड़ी टीम को असम और पश्चिम बंगाल के चुनाव में लगाया गया है।

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