एडीसी ने उपरोक्त विषयों को देखते हुवे फौरन, मधुपुर एसडीओ को आवश्यक कार्यवाही को लेकर दिया आदेश।
देवघर -पालोजोरी अंचल के ठेंगाडीह मौजा (थाना संख्या-391) स्थित 19 डिसमिल पुस्तैनी जमीन को लेकर विवाद एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। मामले में पीड़ित पक्ष चुनु कापरी ने उपायुक्त एवं अपर उपायुक्त देवघर को आवेदन देकर अनुमंडल पदाधिकारी, मधुपुर द्वारा पारित कथित एकपक्षीय आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
पीड़ित चुनु कापरी के अनुसार, मौजा-ठेंगाडीह, थाना संख्या 391, जमाबंदी संख्या-12, प्लॉट संख्या-488 की जमीन उनके पूर्वज स्वर्गीय तीतु कापरी के नाम से सर्वे खतियान में दर्ज है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025-26 तक उक्त जमीन का नियमित लगान भी जमा किया गया है। इसी भूमि पर उनका पुस्तैनी घर, दुकान तथा मुख्य सड़क तक जाने का एकमात्र रास्ता मौजूद है। हाल ही में जारी ‘नया पर्चा’ में भी उक्त भूमि पर उनके दखल का उल्लेख किया गया है।
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब विपक्षी पक्ष के सुनील मंडल, प्रधान संघ नेता श्रीकांत मंडल, पवन मंडल, समीर मंडल, तपन मंडल समेत अन्य लोगों ने उक्त जमीन पर अपना दावा प्रस्तुत किया। विपक्षी पक्ष का कहना है कि यह भूमि सरकार द्वारा अधिग्रहित की गई थी, जिसे एलए केस संख्या 50/1964-65 के तहत प्रस्तुत किया गया था। फिलहाल यह मामला माननीय बंदोबस्त पदाधिकारी, संताल परगना, दुमका की अदालत में आपत्ति वाद संख्या 695/2023 एवं 696/2023 के तहत विचाराधीन है।
पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि मामला उच्च राजस्व न्यायालय में लंबित रहने के बावजूद विपक्षियों ने तथ्यों को छुपाकर एसडीओ कोर्ट, मधुपुर से ज्ञापांक-381/रा० दिनांक 07 मई 2026 के माध्यम से विवादित स्थल पर बाउंड्री वॉल निर्माण हेतु पुलिस बल प्रतिनियुक्ति का आदेश प्राप्त कर लिया। चुनु कापरी का कहना है कि आदेश पारित करने से पूर्व उनका पक्ष नहीं सुना गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि विवादित स्थल पर निर्माण कार्य शुरू होता है, तो पीड़ित का पुस्तैनी घर और दुकान क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। आवेदन में पीड़ित ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।
चुनु कापरी ने कहा, “जब मामला पहले से बड़े न्यायालय में लंबित है और अभिलेखों का सत्यापन बाकी है, तब पुलिस बल के साथ निर्माण की अनुमति देना गरीब परिवार के साथ अन्याय है। हमें उपायुक्त पर पूरा भरोसा है कि न्याय मिलेगा।”
वहीं पीड़ित पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि पालोजोरी थाना बिना किसी स्पष्ट आदेश के जमाबंदी रैयत को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।
