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गोहपारू शराब दुकान में ‘बाहरी’ तत्वों का जमावड़ा: क्या थाने में जमा है इनका चरित्र सत्यापन रसूख के आगे नियम-कायदे हुए बौने

गोहपारू शराब दुकान में ‘बाहरी’ तत्वों का जमावड़ा: क्या थाने में जमा है इनका चरित्र सत्यापन रसूख के आगे नियम-कायदे हुए बौने

शहडोल से राजेश कुमार यादव

गोहपारू स्थानीय शराब दुकान में चल रही अवैध वसूली और गुंडागर्दी ने अब एक बड़े सुरक्षा संकट की ओर इशारा किया है। दुकान में ग्राहकों को धमकाने वाले कर्मचारी आखिर कौन हैं क्या वे अधिकृत सेल्समैन हैं या फिर ठेकेदार द्वारा बुलाए गए बाहरी ‘बाहुबली’ सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन बाहरी कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन (चरित्र सत्यापन) गोहपारू थाने में जमा कराया गया है

नियमों की सरेआम अवहेलना

शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि शराब दुकान के संचालन के लिए नियुक्त हर कर्मचारी का पूरा विवरण, आधार कार्ड और चरित्र प्रमाण पत्र संबंधित थाने में जमा होना चाहिए लेकिन गोहपारू में स्थिति इसके ठीक उलट नजर आती है। सूत्रों की मानें तो यहाँ बड़ी संख्या में बाहरी जिलों के संदिग्ध लोगों को रखा गया है, जिनका कोई आधिकारिक रि मौजूद नहीं है स्थानीय प्रशासन के पास

वर्दी नहीं, पहचान नहीं… सिर्फ दबंगई !

दुकान पर मौजूद कर्मचारियों के पास न तो कोई परिचय पत्र (ID Card) होता है और न ही वे निर्धारित वर्दी में रहते हैं। जब भी कोई स्थानीय नागरिक ‘ओवररेटिंग’ का विरोध करता है, तो ये ‘अज्ञात’ लोग सक्रिय होकर उसे घेर लेते हैं और विवाद पर उतारू हो जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कल को कोई बड़ी अनहोनी या हिंसक घटना होती है, तो पुलिस इन अज्ञात लोगों को कहाँ ढूंढेगी

क्या गोहपारू पुलिस और आबकारी विभाग को इसकी जानकारी है

यह विषय जाँच का केंद्र है कि

क्या आबकारी विभाग ने ठेकेदार से कर्मचारियों की अधिकृत सूची मांगी है

क्या गोहपारू पुलिस ने दुकान का औचक निरीक्षण कर वहाँ मौजूद लोगों के ‘चरित्र सत्यापन’ की जाँच की है

बिना वेरिफिकेशन के बाहरी लोगों को दुकान के भीतर ने की अनुमति किसने

ग्रामीणों में गहराता डर और आक्रोश

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही शराब दुकान के आसपास इन बाहरी तत्वों का आतंक बढ़ जाता है। लोग अब यहाँ जाने से भी कतराने लगे हैं क्योंकि प्रिंट रेट से ज्यादा पैसे तो मांगे ही जा रहे हैं, साथ ही विरोध करने पर ‘बाहरी लोगों’ से पिटवाने की धमकी दी जाती है।

निष्कर्ष और मांग

यह पूरी तरह से प्रशासनिक विफलता का मामला है। श्रमजीवी पत्रकार संघ और क्षेत्र की जनता मांग करती है किः

  • तत्काल दुकान में मौजूद सभी कर्मचारियों के आधार कार्ड और पुलिस वेरिफिकेशन की जाँच की जाए।
  • बिना रिकॉर्ड के काम कर रहे बाहरी लोगों को तत्काल दुकान से बाहर कर उन पर कानूनी कार्रवाई हो।
  • आबकारी विभाग स्पष्ट करे कि किस नियम के तहत इन ‘अज्ञात’ लोगों को दुकान संचालन की छूट दी गई है।
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