पंकज नाथ, असम, आदिवासी एक्सप्रेस :
असम के चिरांग जिले के रुणिखाटा क्षेत्र में वन विभाग के अवैध कब्जा हटाओ अभियान के बाद शुक्रवार को हिंसा भड़क उठी। भारत-भूटान सीमा के निकट हुई इस घटना में वनकर्मियों और आदिवासी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में 20 से अधिक लोग घायल हो गए, जिनमें पुलिसकर्मी, वनकर्मी और स्थानीय नागरिक शामिल हैं। घटना अनुसार बुधवार रात को वन विभाग ने रुणिखाटा वन रेंज में अवैध कब्जा हटाने के दौरान 25 लोगों को हिरासत में लिया था। इनकी रिहाई की मांग को लेकर गुरुवार को स्थानीय महिलाएं सहित ग्रामीण वन कार्यालय पहुंचे, जहां प्रदर्शन तेज हो गया। ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AASAA) और ऑल सांतल स्टूडेंट्स यूनियन (ASSU) द्वारा आयोजित विरोध के दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और कथित तौर पर गोलीबारी की। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग के वाहनों को तोड़ दिया और रेंज कार्यालय में आग लगाने का प्रयास किया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। पथराव में एक पुलिसकर्मी घायल हुआ, जबकि कई महिलाओं को चोटें आईं। छह महिलाएं गंभीर रूप से घायल बताई जा रही हैं, जिन्हें काजलगांव के अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि वन अधिकारियों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया और बिना पूर्व सूचना के अभियान चलाया।AASAA और ASSU ने दावा किया कि विस्थापित आदिवासी परिवारों को निशाना बनाया गया। 1990 के दशक के अंत में नदी कटाव और हिंसा से बेघर हुए ये परिवार वन क्षेत्रों में बस गए थे। संगठनों ने कहा कि एक ही क्षेत्र में अलग-अलग समुदायों के साथ भेदभाव हो रहा है। उन्होंने बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (BTR) में विरोध प्रदर्शन करने और जांच की मांग की। घटना के बाद चिरांग और आसपास मोबाइल इंटरनेट व डेटा सेवाएं निलंबित कर दी गईं ताकि अफवाहें न फैलें। अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हैं और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अधिकारियों ने हिंसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
