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अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद भी आजाद घूम रहा करोड़ों की हेराफेरी का आरोपी

अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद भी आजाद घूम रहा करोड़ों की हेराफेरी का आरोपी

-सरकारी योजनाओं में करोड़ों के घोटाले का आरोप
-कोर्ट से राहत नहीं, फिर भी पुलिस की पकड़ से दूर आरोपी राजेश कुमार
-​सिस्टम पर भारी आरोपी, पुख्ता सबूत और कोर्ट के कड़े रुख के बाद भी नहीं हुई गिरफ्तारी, पीड़ितों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
​दिव्य दिनकर:कुन्दन पासवान
​टंडवा:चतरा।
चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र में एक गंभीर साइबर धोखाधड़ी और सरकारी योजनाओं में करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। टंडवा थाना कांड संख्या 88/2026 के तहत दर्ज इस मामले में करवाई की माँग की जा रही है। पीड़ितों का आरोप है कि बीते 31 मार्च 2026 को लंबे संघर्ष के बाद प्राथमिकी तो दर्ज कर ली गई, लेकिन तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

​न्यायालय ने खारिज की अग्रिम जमानत,जताई गंभीर चिंता
​मामले के मुख्य आरोपी राजेश कुमार ने गिरफ्तारी से बचने के लिए चतरा व्यवहार न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका (ABP No. 502/2026) दायर की थी। न्यायालय ने मामले की गंभीरता और आरोपी के खिलाफ प्रत्यक्ष सबूतों को देखते हुए 26 मई 2026 को अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। सत्र न्यायाधीश,चतरा ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि केवाईसी के नाम पर धोखाधड़ी की गई है,आज ग्रामीण भारत में तेजी से पैर पसार रही है। आरोपी के विरुद्ध आरोप बेहद गंभीर और प्रत्यक्ष हैं।

​सबूत मौजूद, फिर भी आरोपी खुलेआम आजाद है,​शिकायतकर्ताओं में सुमन कुमारी पिता धनेश्वर ठाकुर, ममता कुमारी पिता निर्मल ठाकुर का कहना है कि उन्होंने बैंक स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज,मोबाइल नंबर लिंकिंग, सरकारी रिकॉर्ड तथा अन्य कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच एजेंसी को सौंप दिए हैं। इसके बावजूद आरोपी खुलेआम घूम रहा है। पीड़ितों ने आशंका जताई है कि आरोपी को किसी बड़े रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है, जिसके दबाव में पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर रही है।

​एक बड़े संगठित आर्थिक घोटाले की आशंका
​पीड़ितों के अनुसार, यह धोखाधड़ी सिर्फ दो बैंक खातों तक सीमित नहीं है। उनका दावा है कि यदि इस मामले की निष्पक्षता से जांच की जाए, तो एक बड़े संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ हो सकता है।
​जांच के दायरे में आ सकते हैं बैंक खाते एईपीएस (AEPS) (आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम),यूपीआई नेट बैंकिंग, सीएससी (प्रज्ञा केंद्र) और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी।
​संपत्ति को इधर-उधर करने का पीड़ितों ने टंडवा थाने को लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया है कि आरोपी कथित रूप से अवैध कमाई से गाड़ी, जमीन और अन्य संपत्तियां खरीद रहा है और उन्हें छिपाने की कोशिश में जुटा है।

​पीड़ितों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
​न्याय के लिए भटक रहे पीड़ितों ने अब राज्य सरकार, पुलिस मुख्यालय, साइबर पुलिस और जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने मांग की है कि ​मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

​आरोपी राजेश कुमार को तत्काल गिरफ्तार करने की माँग
​अपराध से अर्जित कथित अवैध संपत्तियों की जांच कर उन्हें जब्त करने की कार्रवाई की माँग की है।यह मामला अब केवल दो खातों से पैसे गायब होने का नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी धन की सुरक्षा, साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस की मुस्तैदी और प्रशासनिक जवाबदेही की एक बड़ी परीक्षा बन चुका है। देखना यह है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी सोई हुई अधिकारी कब जागती है।

इस मामले में टंडवा प्रखंड पदाधिकारी का कहना है कि आरोपी को पैसा रिटर्निंग करने के लिए नोटिस किया गया है जिसका जवाब नहीं दिया गया है। वही इस मामले में थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर पप्पू कुमार शर्मा ने बताया कि इसकी जांच जारी है।

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