रांची। झारखंड के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। हेमंत सरकार ने कर्मियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर संज्ञान लेते हुए उनके हित में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राज्यकर्मियों के वेतन विसंगति, एमएसीपी (मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) और अन्य सेवा शर्तों से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए एक छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया है।
वित्त विभाग द्वारा इस संबंध में आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया गया है। इस समिति की कमान राजस्व पर्षद के सदस्य को सौंपी गयी है, जबकि विभिन्न विभागों के पांच सेवानिवृत्त वरिष्ठ पदाधिकारियों को इसमें बतौर सदस्य शामिल किया गया है। वित्त सचिव प्रशांत कुमार के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र के अनुसार, नवगठित उच्च स्तरीय समिति में भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह, राज्य प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी ओम प्रकाश साह और राज्य पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी राज नारायण सिंह को जगह दी गयी है। इनके साथ ही राज्य शिक्षा सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी जयंत कुमार मिश्रा और राज्य अभियंत्रण सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी उमेश मेहता भी इस कमेटी के सदस्य बनाये गये हैं।
यह उच्चस्तरीय समिति समय-समय पर राज्य के विभिन्न कर्मचारी सेवा संघों द्वारा उठायी जाने वाली वेतन विसंगतियों की जांच करेगी, विभिन्न सेवाओं की सेवा शर्तों में एकरूपता लाने का प्रयास करेगी और एमएसीपी से जुड़े उलझे हुए मामलों का वैज्ञानिक निराकरण ढूंढकर अपनी स्पष्ट अनुशंसा व सुझाव राज्य सरकार को सौंपेगी। इस महत्वपूर्ण समिति के गठन की पृष्ठभूमि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में तैयार हुई थी, जहां इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी थी। राज्य के विभिन्न कर्मचारी संगठन लगातार मुख्यमंत्री से मिलकर वेतन और प्रोन्नति की विसंगतियों को दूर करने की पुरजोर मांग कर रहे थे। सरकार के इस फैसले का झारखंड राज्य कर्मचारी महासंघ ने पुरजोर स्वागत किया है। महासंघ के उपाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि कर्मचारी इस मांग को लेकर लंबे समय से विभिन्न मंचों पर आवाज उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बनने के बाद से ही यहां कार्यरत कर्मचारियों की समस्याएं काफी जटिल और अलग रही हैं। ऐसे में वेतन विसंगति से लेकर प्रोन्नति और एमएसीपी के अनसुलझे मुद्दों को इस उच्चस्तरीय समिति के माध्यम से सुलझाने का रास्ता साफ होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आज भी राज्य के विभिन्न दफ्तरों में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की तृतीय वर्ग में प्रोन्नति का मामला अटका हुआ है, जबकि बिहार में यह प्रक्रिया बहुत पहले पूरी की जा चुकी है। महासंघ का मानना है कि इस पहल से बड़े पैमाने पर व्याप्त विसंगतियां दूर होंगी, जिसके लिए उन्होंने सरकार की सराहना की है।
