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पांचवें दिन खदान मित्रता मिला कान्हु का शव, मासूम बच्चों का इंतजार माता में बदला

पांचवें दिन खदान मित्रता मिला कान्हु का शव, मासूम बच्चों का इंतजार माता में बदला

घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, परिजनों का आरोप है कि समय रहते यदि गोताखोर टीम बुलाई जाती तो शायद पहले ही स्थिति स्पष्ट हो जाती है।

पाकुड़ – पाकुड़ नगर थाना क्षेत्र के शहर कल स्थित पानी से भारी खदान में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक अंत सामने आया। सोना जोड़ी निवासी 28 वर्षीय कान्हु किस्कू का शव इस खदान में तैरता हुआ मिला, जहां उसके डूबने की आशंका परिजनों द्वारा पहले दिन से ही जताई जा रही थी। चार दिनों से लापता युवक की तलाश में झूठे परिजनों और ग्रामीणों का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ। लेकिन यह अंत इतना दर्दनाक होगा, इसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। सुबह जब कुछ ग्रामीणों की नजर खदान के पानी पर पड़ी, तो उसमें एक शव तैरता दिखा। देखते ही मौके पर भीड़ जुट गई और पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से शव को खदान से बाहर निकलवाया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार मामला बीते सोमवार सुबह करीब 10:00 बजे कान्हु किस्कू घर से सोच के लिए निकला था। आसपास के बच्चों ने उसे घर के पास स्थित खदान की ओर जाते देखा था। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की। स्थानीय स्तर पर ट्यूब और नाव के सहारे तलाश की गई , लेकिन कोई सुराग नहीं मिला था। परिजनों ने शुरू से ही आशंका जताई थी कि वह खदान में डूब गया होगा। इसके बावजूद चार दिनों तक प्रशासन की ओर से गोताखोर टीम नहीं बुलाए जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश था।
इस घटना ने परिवार का सहारा को ही छीन लिया, कान्हु किस्कू की मौत ने उसके परिवार को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया है। चार दिनों से अपने पिता की लौटने का इंतजार कर रहे 6 वर्षीय होपना किस्कू और चार वर्षीय एलेक्स किस्कू अब हमेशा के लिए पिता के साए से वंचित हो गए। वृद्ध माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस घर में कभी हंसी खुशी का माहौल था, वहां आप सन्नाटा और सिसकियां गूंज रही है।
इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि समय रहते यदि गोताखोर टीम बुलाई जाती, तो शायद पहले ही स्थिति स्पष्ट हो जाती । चार दिनों तक केवल आश्वासन मिलता रहा और उम्मीद लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब आप शव मिलने के बाद परिजनों की आशंका सही साबित हुई है, लेकिन उनके दर्द को कम नहीं किया जा सकता।

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