रांची (झारखण्ड):
राहे एवं सोनाहातु प्रखण्ड क्षेत्र में अहीर समाज के लोगों के लिए जाति प्रमाण पत्र बनवाना इन दिनों एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। प्रखण्ड कार्यालय द्वारा हाल ही में लिए गए निर्णय के कारण बड़ी संख्या में आवेदनों को अस्वीकार किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
मामले के अनुसार, इस क्षेत्र के कई परिवारों के खतियान (भूमि अभिलेख) में जाति/कौम के रूप में “अहीर, ग्वाला, गोआर/गोवार” दर्ज है। पहले इन सभी नामों के आधार पर लोगों को आसानी से BC-2 श्रेणी का जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाता था।
हालांकि, वर्तमान में प्रखण्ड कार्यालय का कहना है कि “गोआर/गोवार” नाम झारखंड सरकार की BC-2 सूची में शामिल नहीं है, इसलिए इस आधार पर प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता। इस कारण कई आवेदकों के आवेदन पत्र सीधे खारिज किए जा रहे हैं।
अंचल पदाधिकारी का स्पष्ट कहना है कि:
“खतियान में दर्ज ‘गोवार’ जाति BC-2 सूची में नहीं है, इसलिए जाति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जा सकता।”
जब प्रभावित लोगों ने यह तर्क दिया कि पहले इसी आधार पर प्रमाण पत्र जारी होते रहे हैं, तो अधिकारियों ने जवाब दिया कि वर्तमान में नियमों के अनुसार ही कार्यवाही की जा रही है और पूर्व की स्थिति की जानकारी उन्हें नहीं है।
इस निर्णय के चलते अहीर समाज के लोगों में गहरी चिंता व्याप्त है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो भविष्य में सरकारी नौकरियों, छात्रवृत्ति योजनाओं और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण अवसरों से वंचित होना पड़ सकता है।
स्थानीय समाज के बुद्धिजीवियों और प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि “अहीर, ग्वाला और गोवार” जैसी पारंपरिक जाति नामों को लेकर उत्पन्न भ्रम को दूर किया जा सके और प्रभावित लोगों को राहत मिल सके।
