झारखण्ड के कोयला खानों पर पूंजीपतियों का गिद्ध दृष्टि

अरुण कुमार चौधरी
भारत में    सूरत   हीरा  के लिए  प्रसिद्ध   है  वहीं दूसरी ओर धनबाद काला हीरा के लिए प्रसिद्ध है !कोयला खानों की   कहानी अंग्रेजों के समय से ही है,अंग्रेजों के समय  कोयला खान उसके दलालों तथा पूंजीपतियों के हाथ में था! रेल के पास            अपनी स्टीम इंजन चलाने के लिए कुछ  कोयला खानों  रहते थे !      इसके अलावा भी कुछ खाने सरकार अपनी  प्लांट चलाने के लिए सरकार के  पास था,  इसके अलावा भी कुछ खाने स्टील प्लांट  चलाने के लिए  टाटा कंपनी को दिया गया था,     लेकिन   कोयला   खानों  का    बहुत  बड़ा भू- भाग      पूंजीपतियों के हाथ में था, जिसमें मजदूरों  का    खान में  बड़े पैमाने पर शोषण होता था!  खानों   में काम करने के लिए मालिक अपना पोषित पहलवान रखते थे,  जो कि समय-समय पर मजदूरों  पर  अत्याचार और    तरह -तरह के     क्रुर यातनाऐं देते थे , या समझये   की मजदूरों को जानवर से भी बदतर स्थिति में रखते थे ,जिसका अभी विवरण करने से  पूरा अध्याय लिखा जा सकता है इसमें मजदूरों  के नेता का भी बहुत बड़ा दबदबा रहता था ! खासकर धनबाद झरिया क्षेत्रों में स्वर्गीय बीपी सिन्हा का वर्चस्व रहता था, इनका संबंध सीधे कांग्रेस के आलाकमान    के साथ  था ,        स्वर्गीय सिन्हा के सामने बड़े-बड़े खान मालिक और नेता नत मस्तक रहते थे!
I have never gone anywhere….” Indira Gandhi | The Policy Times
1971  के   लोक   सभा चुनाव   में  स्वर्गीय   इंदिरा गांधी  की   भारी जीत के बाद गरीबों,बेरोजगारों तथा अन्य कई तरह के कल्याणकारी कार्यों के लिए कई संस्थाओं को राष्ट्रीयकरण किया गया था, उसमें से  विशाल कोयला खदानों का रातों-रात राष्ट्रीयकरण हुआ! इस राष्ट्रीयकरण में  स्वर्गीय बीपी सिन्हा का बहुत ही बड़ा योगदान रहा!
 इस राष्ट्रीयकरण के बाद मजदूरों के जिंदगी में एक नया सुनहरा  अवसर आया था ! मजदूरों की स्थिति में आमूलचूल परिवर्तन होने लगा ,परंतु राष्ट्रीयकरण के समय खानों के मालिक के  पहलवान  और गुंडे   पिछले दरबाजे से    कोल कंपनी में प्रवेश कर गए तथा अपने दबंगई के कारण मजदूर यूनियन बनाकर माफिया गिरी शुरू कर दिया !यह माफिया  सभी पार्टियों में थे तथा इनके आका का   संपर्क सीधे दिल्ली में  रहता था, 1978 में    स्वर्गीय सिन्हा की हत्या जाने-  माने   पत्रकार  स्व .ब्रहदेव शर्मा  के सामने स्व सूरजदेव सिंह  ने   किया था !   स्वर्गीय
 बी पी सिंहा  की हत्या के बाद से स्वर्गीय  सिंह का धमक  पूरा कोयलांचल चलने लगा !  स्वर्गीय सिंह की  तूती  दिल्ली तक   बजने लगा   और   कोयला क्षेत्रों में हत्याओं   का सिलसिला बड़ी जोर शोर से शुरु हो गया!और  हत्यााओं  का दौर काफी समय तक चलता रहा ! इसी बीच   1975  में    कोल इंडिया नाम का   एक विशाल कंपनी बना,जिसमें  लाखों    लोगों को रोजगार मिला तथा    बेरोजगारों  के      जिंदगी में   नई किरण  की    रोशनी  मिली!  उस समय कोल इंडिया में करीबन सात लाख    कर्मचारी काम करते थे ,  जबकि   कोल इंडिया साइट के अनुसार     अप्रैल २०२० तक २,७२,४४५ कर्मचारी ही  बच गये  हैं !    कोल इंडिया एक महारत्न कम्पनी  है!
Millennials have seen India shining, they will judge Modi by last ...
 पिछले छह वर्षों   में कोल इंडिया को मोदी सरकार पंगु   बना रही है! इसका विकास होने से एक करोड़ लोगों की जीविका हो सकती  है      देश में लाखों लोगों की बेरोजगारी दूर हो सकता है तथा मजदूरों  को    आर्थिक  व     तरह -तरह की क्रुर यातनाऐं नहीं होगें    ,जोकि   बर्ष१९७१के पहले मजदूरों  को   जलील होना पडता था !  यानि मेरे कहने का मतलब यह है कि कोई भी  संस्था को जनहित में बनाने के लिए  वर्षों लग जाता है, परन्तु उसे बेचने  में मात्र कुछ घंटे लगेंगे !मोदी सरकार  केवल झूठ और फेरव के  विज्ञापनों पर गरीबों को ठग  रहा है तथा  पूँजिपतियों  के गोद में  बैठ कर शासन चलना चाहती है! इसी उदेश्यःसे झारखण्ड के कोयला खानों को पूँजिपतियों के हाथों में देकर झारखण्ड के गरीबों पर  कहर  ढहने के लिए कोयले की नीलामी कर रहें हैं  और इस  नीलामी के विरोध में
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन    ने  कमर कस लिया है   और     आम लोगों  का  भी    कहना है कि मुख्यमंत्री का कदम सही है !
Jharkhand Cm Hemant Soren Says, Those Who Will Spoil The Harmony ...
कोयले की नीलामी को लेकर सरकार तथा भाजपा आमने -सामने हो गया है

कोल ब्लॉक नीलामी मामले में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने के संबंध में मुख्यमंत्री ने बताया कि झारखंड के लोग काफी लंबी लड़ाई के बाद अपने हक को लेकर जागरूक हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज देश की अर्थव्यवस्था क्यों ध्वस्त हुई है, कितने लोगों का रोजगार छीना है, उद्योग धंधे बंद हुए है, कितने घरों का चूल्हा नहीं जल रहा है, केंद्र सरकार के निर्णयों से लोगों की जान क्यों जा रही है, सारी बातों को लेकर सभी चिंतित हैं।

उन्होंने बताया कि झारखंड में पूर्व से ही भारत सरकार के कई उपक्रम संचालित हैं, क्या उन परियोजनाओं से विस्थापित होने वाले लोगों को हक मिल चुका है, क्या इन परियोजनाओं से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचा है। आज झारखंड के लोग लाल पानी और काला पानी पीने को मजबूर हुए हैं, माइनिंग क्षेत्र में सबसे अधिक बीमारियां सृजित हुई हैं, केंद्र सरकार को इन सभी बातों पर ध्यान देना होगा। अब राज्य सरकार ने पूर्ण तरीके से इन मामलों पर ध्यान देने का निर्णय लिया है और राज्य सरकार लोगों को हक और अधिकार दिलाने का काम करेगी।

एक सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि बाबू लाल मरांडी अभी-अभी भाजपा में गए हैं। उन्हें बहुत दिन के बाद बोलने का मौका मिला है। उन्हें तत्थों की जानकारी प्राप्त करके बोलना चाहिए। 40-50 साल बाद राज्य के लोग पुरानी प्रथा से बाहर निकल कर अपने अधिकार पाने की स्थिति में आए हैं। ये बता क्यों नहीं रहे हैं कि इसके पीछे का मूल षड़यंत्र क्या है। उनका संदर्भ कोल ब्लॉक की नीलामी था।

Ranchi News In Hindi : Babulal Marandi can contest elections from ...

दूसरी ओर कोल ब्लॉक नीलामी के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने का मामला तूल पकड़ रहा है़ भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी सरकार के इस कदम पर बरसे है़ं श्री मरांडी ने कहा : नैसर्गिक संसाधन के लूट-खसोट के लिए सरकार नीलामी का विरोध कर रही है़, जबकि इससे राज्य को हजारों करोड़ का राजस्व मिलता़ देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के रहते कोई लूट नहीं कर सकता है़ राज्य की जनता को उसका हक मिलेगा़ आज हेमंत सोरेन जिस सहयोगी के साथ सरकार चला रहे हैं, उनके नाम घोटाले की लंबी फेहरिस्त है़

मरांडी ने कहा कि अगर सीएम रैयतों के पक्ष में काम करने को उत्सुक हैं तो वे रैयतों के लिए नीलामी से होनेवाले लाभांश का कुछ हिस्सा, भूमि के बदले भूमि और 85 प्रतिशत नौकरियों विस्थापितों के लिए आरक्षित कर दें। इन सब कार्यों में भाजपा आगे बढ़ कर राज्य सरकार का साथ देगी।लेकिन इन सब कामों से भागना और केंद्र की आलोचना करने से राज्य सरकार को बचना होगा!

Jharkhand Coal Block Auction/Ranchi Updates | Former MP And ...

इस के साथ -साथ सरकार की सहयोगी दल पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता फुरकान अंसारी ने कहा है कि झारखंड राज्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जागीर नहीं है कि वे यहां के बारे में जो चाहे निर्णय ले ले। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से बिना बातचीत किए ही कोल ब्लॉक की नीलामी करने का निर्णय ले लिया है। यह एक तरफा निर्णय है और केंद्र के इस निर्णय को झारखंड में लागू होने नहीं देंगे। झारखंड में आम जनता की सरकार है। यहां राज्य सरकार की अनुमति के बिना एक इंच गड्ढा भी खोदने नहीं दिया जाएगा।

पूर्व सांसद ने केंद्र सरकार द्वारा कोल ब्लॉक की नीलामी करने के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने सिर्फ कोल ब्लॉक की नीलामी का ही निर्णय नहीं लिया है बल्कि इसे प्राइवेटाइजेशन करने तक का मन बना लिया है, जो कोल सेक्टर के लिए घातक है। कोल ब्लॉक की नीलामी से पहले झारखंड में सामाजिक, आर्थिक सर्वे होना जरूरी था। ताकि उससे पता चले कि पूर्व में हुए खनन से हमें क्या लाभ अथवा हानि हुई।
पूर्व सांसद ने सरयू राय द्वारा कोल ब्लॉक आवंटन संबंधी सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने की मांग को लेकर भी कहा कि मुझे सरयू राय की बॉडी लैंग्वेज समझ में नहीं आती। कभी वह हेमंत सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने के निर्णय का स्वागत करते हैं। तो कभी इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करते हैं। कोल ब्लॉक आवंटन विषय पर राज्य सरकार अपने मंत्रिमंडल एवं अपने विधायकों से बातकर निर्णय लेगी। इसमें सभी दल के नेताओं को बुलाने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार निर्णय लेने के लिए सक्षम है

मोदी जी गरीबों का हित देखें
                                   निवेदन
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