मुख्यमंत्री के घोषणा से  सूचना एवं जन -सम्पर्क विभाग में खलबली

अरुण कुमार चौधरी

मुख्यमंत्री ने घोषणा किया कि पिछली रघुवर सरकार के समय भ्रष्टाचार में लिप्त विभागों पर कार्रवाई की जाएगी !इस कारण सूचना एवं जन -सम्पर्क विभाग में खलबली मच गया है !

पिछले 5 वर्षों से सूचना एवं जन -सम्पर्क विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया था इसमें पूर्व प्रभारी निदेशक अवधेश पांडे ने नंगा नाच कर लूट मचाया था इस नंगा नाच में अभी भी बहुत से जुनियर पदाधिकारी सूचना भवन में पदस्थापित हैं, ऐसे तो श्री पांडे का अनेक कुकर्म है जिसमें से एक का उदाहरण दे रहा हूं इसने श्री पांडे ने सारे नियम कानूनों को ताक पर रखकर नई अखबारों को विज्ञापन के लिए सूचीबद्ध किया था,जिसमें अवधेश पांडे ने दस लाख रुपए लिए था , इसके साथ – साथ नई अखबारों को डीएवीपी दर नहीं रहने के कारण इन्हें मनमानी दर दिया गया था !इस लूट में कई जुनियर पदाधिकारी भी सम्मिलित थे जो कि अभी भी अवधेश पांडे के इशारे पर नाच रहे हैं और जो समाचार पत्रों ने पांडे के भष्ट्राचार से संबंधित समाचार प्रकाशित किया था, उसे अभी भी अवधेश पांडे के इशारे पर जुनियर पदाधिकारी समाचार पत्रों को तंग कर रहें हैं इस घूसखोरी में जुनियर पदाधिकारियों को भी भ्रष्टाचार का पैसा मिलता था, जो कि अभी पूरी तरह से बंद हो गया है लेकिन अवधेश पांडे के चेले अभी भी बाज नहीं आ रहे हैं!अभी वर्तमान निदेशक और सचिव को उल्टा—- पुल्टा बात समझा कर आनाकानी करते हैं !

49वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में झारखंड को चुना गया फोकस स्टेट

दूसरे  पूर्व निदेशक राम लखन गुप्ता और पूर्व सचिव सुनील बरनवाल रघुवर सरकार के समय में रंगा बिल्ला की तरह काम करता था! इस के समय में दोनों हाथों से आदिवासी गरीब जनता का पैसा 400 करोड़ रुपए विज्ञापन के रूप में लुटाया गया था! जहां झारखंड की गरीबआदिवासी जनता भूख से तड़प कर मर रहा था! वही पूर्व सूचना एवं जन -सम्पर्क विभाग निदेशक गुप्ता और सचिव बरनवाल करोड़ों रुपया घूस लेकर मौजमस्ती में लगे रहते थे इस समय यह भी जानकारी मिली है कि अवधेश पांडे, राम लखन गुप्ता सुनील बरनवाल तथा इनके चेले जुनियर पदाधिकारी हेमंत सरकार को बदनाम करने के लिए षड्यंत्र कर रहा है! इसलिए कई बुद्धिजीवी संगठन, पत्रकार संगठन मांग कर रहे हैं कि पूर्व निदेशक अवधेश पांडे तथा रंगा बिल्ला का जांच सीबीआई द्वारा किया जाए !Jharkhand to become global hub for filmmaking: Anupam Kher ...

इसी से संबंधित झारखंड सरकार ने दागी अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंत्रिमंडलीय समन्वय विभाग से आरोपी अधिकारियों का पूरा ब्योरा देने के लिए कहा है। कैबिनेट सचिव को पत्र भेजकर पिछले पांच साल की पूरी फेहरिस्त तलब की है। कैबिनेट सचिव से तलब ब्योरे में भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और राज्य प्रशासनिक सेवा के दागी अधिकारियों के बारे में कैडरवार ब्योरा देने के लिए कहा गया है। हालांकि, ब्योरा प्राप्त होने के बाद की प्रक्रिया में बारे में कुछ नहीं कहा गया है। सूत्रों का कहना है कि इसके जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कड़ा कदम उठा सकते हैं। पिछले पांच साल में साढ़े चार साल रघुवर दास का कार्यकाल था। हेमंत सरकार का रघुवर राज के समय नौकरशाही में हो रही ग़ड़बड़ी से पर्दा उठाना भी मकसद हो सकता है।
सीएम के सवाल का जवाब नहीं दे सके अधिकारी : पिछले दिनों मुख्यमंत्री के सामने कुछ दागी अधिकारियों के खिलाफ लंबे समय से लंबित कार्रवाई की चर्चा वरिष्ठ अधिकारियों ने की। इसके बारे में विस्तृत जनकारी किसी के पास नहीं थी। किसी भी विभाग के पास इस बारे में संकलित रिपोर्ट नहीं था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडलीय सचिव को पत्र लिख कर पूरी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया।
कितनों के खिलाफ नहीं मिली अनुमति : राज्य सरकार के सूत्रों ने बताया कि मंत्रिमडलीय समन्वय विभाग को यह भी बताने के लिए कहा गया है कि कितने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति नहीं मिली। इसके अलावा पिछले पांच साल में कितने अधिकारियों के खिलाफ कारर्वाई हुई, इसके बारे में भी बताने के लिए कहा गया है। पूर्ववर्ती सरकार में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। जांच के दायरे में आए अधिकारियों की जांच रिपोर्ट से भी अवगत कराने के लिए कहा गया है। इसी तरह विभिन्न एजेंसियों की जांच की मांग पूरी नहीं होने के बारे में भी सूचना मांगी गई है। मांगे गए विंदुंओं पर अद्यतन जानकारी देने के लिए कहा गया है। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट सचिव ने अपने विभाग के अधीन आने वाले निगरानी विभाग को रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी है। रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही मुख्यमंत्री को उपलब्ध कराया जाएगा।
जांच रिपोर्ट आने के बाद भी कार्रवाई नहीं : पिछले दो साल के अंदर कई ऐसे मामले उजागर हुए, जिसमें जांच रिपोर्ट को भी दबा दिया गया। दोषी अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। कई मामलों में लोकायुक्त के आदेश पर भी कार्रवाई नहीं हुई।
कैसे-कैसे हैं मामले
1. नियमों को दरकिनार कर विकास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया गया।
2. चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए कायदे-कानून ताक पर रख दिए गए।
3. मॉनीटरिंग में लापरवाही के कारण आमलोगों को बहुंत बड़ा नुकसान हुआ।
4. निजी फायदे के लिए सरकारी राशि के गबन की साजिश रची गई।
5. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा रिश्त लेते रंगे हाथों पकड़े गए।

 

                                                        निवेदन
ऐसे तो हजारों पाठकों का भरपूर सहयोग मिल रहा है, जिसके कारण हम अपनी सच्ची पत्रकारिता को आगे बढ़ा रहे हैं !इसी क्रम में प्रबुद्ध पाठकों से आग्रह है कि हम    आलेख    को प्रस्तुत करता हूं,! इसमें कुछ त्रुटियां हो सकती है, जिसे आप हमें समय-समय पर अवगत करा सकते हैं और आपका सुझाव मेरे लिए बहुत ही मूल्यवान होगा!
इस संबंध में कहना है कि अगर मेरी प्रस्तुति अच्छा लगे, तो आप अपने मित्रों, परिवारजनों तथा बुद्धिजीवियों को अधिक से अधिक इस प्रस्तुति को अग्रसारित करते रहें और हमें हौसला बढ़ाते रहें ।
                                                                                                                                                                                                                      आपका
                                                                                                                                                                                                              अरुण कुमार चौधरी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Related posts

Leave a Comment