भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबा है रांची नगर निगम

अरुण कुमार चौधरी

रघुवर सरकार के पिछले  5 साल में बड़ी ही चालाकी से भ्रष्टाचार होते रहा , क्योंकि रघुवर ने  राज्य के करीबन  95% मीडिया हाउस को अपने कब्जे में कर लिया ,इन मीडिया हाउस को बेहिसाब विज्ञापन देकर करीबन चार सौ करोड़ रूपया खर्च किया था और जो  मीडिया  सच्ची खबर प्रकाशित करते थे उसे तत्कालीन  पी आर डी के    सचिव  और  निदेशक के साथ ही साथ रघुवर के कुछ फालतू गुंडे उस मीडिया के पत्रकारों को डराया धमकाया जाता था और तरह-तरह की उत्पीड़न किया जाता था और इसके बाद के  झारखंड के सारे के सारे विभाग में लूट  मच गई थी! रांची. नगर निगम में हर तरफ भ्रष्टाचार फैला हुआ है… इसे लेकर अक्सर घूस-घोटाले की खबरें सामने आती रहती हैं।पिछले  5 साल से     रांची नगर निगम में       उप मेयर  का    बेटा  लूट मचाए हुए है, उप मेयर के बेटे के कारनामे  जिसकी चर्चा पिछले 3 वर्ष पूर्व अखबार में छपा था, उसके बाद भी रांची नगर निगम  का    भ्रष्टाचार रुका    नहीं!,.  खुलेआम उप मेयर के पीए कहते रहते थे कि इसमें कोई भी संवेदक टेंडर नहीं भरे  और  बाद में ऊंची दरों पर सारी की सारी की ठेकेदारी उप मेयर के बेटे को नामी तथा बेनामी कंपनियों को दिया जाता रहा !   जिसके कारण मेयर और उप मेयर में झंझट होते रहता था तथा तत्कालीन मंत्री के हस्तक्षेप से मामला शांत हो जाये करता    था!  इस सम्बन्ध में   लोगों का कहना है कि सारे ठेकेदारी में तत्कालीन मंत्री को 2 से 3% का भी कमीशन दिया जाता था!इस समय हेमंत सरकार ने  भ्रष्टाचारियों पर लगाम कसना शुरु कर दिया है,जिस के कारण सभी जगह हड़कंम मचा हुआ है!

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और  अभी  रांची नगर निगम के भ्रष्टाचार   तथा अनियमिकता को  भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ( एसीपी )     ने उजागर किया है रिपोर्ट में कहा है कि नगर निगम में काम कराने के लिए लोगों को मोटी रकम रिश्वत के रूप में देनी पड़ती है। स्थिति यह है कि बिना घूस दिए कोई भी काम नहीं होता। चाहे वह घर-अपार्टमेंट का नक्शा पास कराने का मामला हो या फिर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना हो, बिना चढ़ावा चढ़ाए काम नहीं किया जाता। बिचौलियों के मार्फत मोटी रकम वसूली जाती है।होर्डिंग लगाने में भी बड़ा खेल होता है। होर्डिंग लगाने वाली एजेंसी सिटी मैनेजर को पैसा खिलाकर छोटी होर्डिंग की परमिशन लेती है और बड़ी होर्डिंग लगाती है।

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नक्शा: पहले रिजेक्ट, फिर बिना नए कागजात दिए पास

कई नक्शे पहले रिजेक्ट किए गए, बाद में बिना नया कागजात के उसी अधिकारी द्वारा पास कर दिया गया। बहुमंजिली इमारतों का नक्शा पास करने का रेट फिक्स है। टाउन प्लानर की भूमिका संदिग्ध है।

वाटर बोर्ड : आवेदन की तिथि अंकित नहीं होती

सप्लाई पाइपलाइन, हैंडपंप की मरम्मत के लिए कोई आवेदन तिथि अंकित नहीं होती है। ऐसे में आवेदक यह दावा नहीं कर सकता कि उसने कब आवेदन दिया था। विद्युत शाखा में रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है।

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र : ठेका दलालों के पास

निगम में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में कई दलाल सक्रिय हैं, जो आवेदकों से मोटी रकम लेकर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का ठेका ले लेते हैं। आवेदक परेशानी के कारण दलालों का सहारा लेते हैं।

होर्डिंग्स : छोटी का शुल्क लेकर बड़ी होर्डिंग लगाते हैं

इनफोर्समेंट टीम : मामलों का रजिस्टर अपडेट नहीं

इनफोर्समेंट टीम के गठन और निगम द्वारा टीम से कराए जा रहे कार्यों पर भी सवाल खड़ा किया है। इनफोर्समेंट से संबंधित रजिस्टर अप-टू-डेट नहीं मिले। इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि इनफोर्समेंट में कितने मामले आए और कितने निपटाए गए।

विनय कुमार चौबे हो सकते हैं हेमंत ...

नगर विकास सचिव विनय कुमार चौबे ने नगर निगम को पत्र लिखकर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश पर एसीबी ने फरवरी में नगर निगम की कार्यप्रणाली की जांच की थी।

 

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