राजबाला ,राम कृपाल तथा नक्सलियों के सांठगांठ का पर्दाफाश

अरुण कुमार चौधरी

पिछले दो दिनों से झारखंड में एक भूचाल सा आ गया है, इसमें आरकेएस कंस्ट्रक्शन के मालिक राम कृपाल सिंह के बेटे रंजीत सिंह के कई ठिकानों पर एनआइए मंगलवार के दिन से ही छापेमारी किया ! इसे टेरर फंडिंग से मामला जुड़ा है.
रंजीत सिंह का राजनीतिक हलकों में  लंबी पकड़ है!पिछले 25 वर्षों से रंजीत सिंह को झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव श्रीमती  राजबाला वर्मा  आगे  बढ़ाने में     बहुत बड़ा योगदान है! बिहार से झारखंड तक  अरबों रुपए का काम के बदले में रंजन सिंह से मोटी रकम लेती थी! रंजन सिंह ने 5 साल में झारखंड में खुलेआम मनमानी किया है

राजबाला वर्मा के पुत्र तथा रंजीत सिंह मिलकर मुंबई फिल्म सिटी में एक स्टुडिया बनाया है ! जिसकी लागत करीबन 500 करोड़ है, इसमें प्रतिदिन दस लाख रूपये का भाड़ा के रूप में मिल रहा है !आर के एस कंस्ट्रक्शन ने निर्माण की जमीन से सत्ता के फ़ोटो का कोई वर्णन उपलब्ध नहीं है.गलियारे तक बनाई धमक!

 

चित्र में ये शामिल हो सकता है: रात, आकाश और बाहर

राजबाला वर्मा ने रधुवर के दरबार में रंजीत सिंह को पहुंचाया था ओर इस के बाद रंजीत सिंह का धमक  पूरे      झारखण्ड के प्रधान सचिव के अधिकारी स्तर होगया! इनके लिए बड़े – बड़े अधिकारी का स्थानांतर चुटकी बजने के सामान था ! इस के अलाबे रंजीत सिंह रघुवर के सचिवालय में सचिव सुनील बनरबल ,प्रेस सलाहकार अजय कुमार तथा रधुवर के परिवार को करोड़ों रूपया प्रत्येक माह घूस देता था !और इसीसे संबंधित समाचार एक साल पूर्ब बिरसा टाइम्स में प्रकाशित किया था,इस के बाद से ही बिरसा टाइम्स   को झारखण्ड सरकार का विज्ञापन देना बंद कर दिया था और हम पर बाद में कई तरह के एफ आई आर कर दिया गया था, हालांकि बाद में सभी निरस्त हो गए!

झारखण्ड :: 14 साल बनाम 1000 दिन की ...

में रामकृपाल कंस्ट्रक्शन जानी-मानी कंस्ट्रक्शन कंपनी है. सड़क निर्माण से लेकर तमाम तरह के भवन निर्माण रघुवर सरकार के कार्यकाल में इस कंपनी ने राज्य में किये हैं.राज्य में एनआइए की टीम टेरर फंडिंग से जुड़े कई मामलों का अनुसंधान कर रही है। इसी क्रम में एनआइए की टीम ने गिरिडीह के डुमरी क्षेत्र से गिरफ्तार एक नक्सली से जब पूछताछ की तो पता चला कि रामकृपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भी सड़क निर्माण के दौरान नक्सलियों को लेवी दी।बनवारी यादव) को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. 38 साल का मनोज गिरिडीह जिले के सरिया थाना क्षेत्र के केशवारी का रहनेवाला है.
वह रामकृपाल कंस्ट्रक्शन से छह लाख रुपये और अन्य सामग्री लेकर माअोवादी कृष्णा दा उर्फ कृष्णा हांसदा उर्फ कृष्णा मांझी उर्फ अविनाश दा के पास जा रहा था. इसी क्रम में उसे पकड़ा गया था. लेकिन उस वक्त यह खुलासा नहीं हो पाया था कि लेवी का पैसा किसका है. एनआइए ने मामले को टेकओवर कर जब जांच शुरू की, तब यह बात सामने आयी.माओवादी कृष्णा गिरिडीह जिले के पीड़टाड़ थाना क्षेत्र के मंडलाडीह लेधवा का निवासी है. वह माओवादी संगठन की झारखंड क्षेत्रीय समिति का सदस्य है. मामले में मनोज कुमार के अलावा कृष्णा दा भी आरोपी है. इसी मामले में मंगलवार को एनआइए ने रामकृपाल कंस्ट्रक्शन के रांची स्थित ठिकानों पर छापेमारी की थी.इस दौरान कुछ दस्तावेज भी मिले थे. एनआइए के मुताबिक भाकपा माओवादी के सदस्य लेवी के पैसे से हथियार, गोला-बारूद व विस्फोटक खरीद कर सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हैं. वहीं संगठन के प्रभाव को बढ़ाने के लिए नये कैडर की भर्ती और सुरक्षा में खलल डालने वाली विघटनकारी गतिविधियों को अंजाम देते हैं
इसके बाद तफ्तीश के लिए एनआइए की टीम रामकृपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी के दफ्तर पहुंची। इतना ही नहीं, यह सूचना भी मिली है कि एनआइए को रामकृपाल कंस्ट्रक्शन से जुड़े एक परिवार के शादी-समारोह के कुछ फुटेज हाथ लगे हैं, इसमें ऐसे लोग भी दिखे हैं, जिनकी एनआइए को टेरर फंडिंग में तलाश है। एनआइए फिलहाल प्रत्येक बिंदुओं को खंगाल रही है।

एनआइए  के अधिकारी मंगलवार की सुबह ही रामकृपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी के कचहरी रोड स्थित पंचवटी प्लाजा के दफ्तर में पहुंच गए। इसके बाद ही जांच शुरू हो गई। सूचना पर पहुंचे कंपनी के संचालक से भी एनआइए के अधिकारियों ने पूछताछ की है। रामकृपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी को पूर्ववर्ती रघुवर दास की सरकार में बहुत सारे काम मिले हुए थे।झारखंड में करीब 465 करोड़ में बना नया विधानसभा भवन, सारंडा में सड़क निर्माण, हाई कोर्ट के नए भवन का निर्माण, जिसका बजट 300 करोड़ से बढ़ाकर 600 करोड़ रुपये कर दिया गया था, का ठेका रामकृपाल कंस्ट्रक्शन को ही मिला था। विधानसभा भवन में गत दिसंबर महीने में लगी आग मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने की बात थी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई थी। इसी तरह नए हाई कोर्ट भवन के निर्माण का बजट बढ़ाए जाने पर भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी थी
राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा के निर्माण पर अंगूली उठायी है. उन्होंने कई बार कहा है कि निर्माण में गड़बड़ी हुई है. साथ ही इतने बड़े भवन की जरूरत भी नहीं है.
तत्कालीन मंत्री सरयू राय ने अपने मौजूदा सरकार से कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि सारंडा में बिना जरूरत 31 किमी सड़क निर्माण का काम रामकृपाल कंस्ट्रक्शन को दिया गया है. इस काम में बड़े अफसरों की मिलीभगत से कानूनों का उल्लंघन हुआ है. साथ ही भ्रष्टाचार का भी मामला इसमें जुड़ा है.
झाऱखंड का दूसरा सबसे भव्य निर्माण भी राम कृपाल कंस्ट्रक्शन के जिम्मे है. झारखंड में नये हाईकोर्ट का निर्माण नये विधानसभा के बगल में हो रहा है. जिसका बजट पहले के मुताबिक 300 करोड़ बढ़कर करीब 600 करोड़ का हो गया है.
इस मामले को लेकर राज्य में काफी सियासी उठापटक हुई है. रघुवर सरकार के दौरान लगे आरोपों पर न ही किसी तरह का कोई संज्ञान लिया गया न ही कंपनी पर किसी तरह की कोई कार्रवाई की गयी. सब जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा कर दिया गया.

झारखण्ड के गरीबों को रधुवर ने दोनों हाथों  से लूटा है

 

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पूरे

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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