कोल माफिया के काली कमाई पर शिकंजा कसने की तैयारी!

अरुण कुमार चौधरी

पिछले कई दशकों से झारखंड में कोयला माफियागिरी हो रहा    है ,इसमें राजनीतिक नेता, नक्सली , कोयला माफिया तथा कोयला कंपनी के अधिकारी की मिलीभगत से कोयले की लूट हो रही है !वैसे इस समय झारखंड में  ईमानदार नेतृत्व के कारण झारखंड के मुख्य सचिव श्री सुखदेव प्रसाद तथा पुलिस महानिदेशक श्री एम पी राव       एक सख्त और ईमानदार अधिकारी है जिसके कारण झारखंड में सभी तरह के लूट पर लगाम लगने जा  रहा है  ! इस समय सीसीएल में व्याप्त भ्रष्टाचार का बोलबाला  है ,! सीसीएल में  एरिया महाप्रबंधक,  परियोजना प्रबंधक पैसे के बल पर पदस्थापित होते हैं!  इसके बदले में ये लोग   एरिया  और परियोजना में भ्रष्टाचार का गंगोत्री   बहाते  रहते हैं !और खुलेआम  कोयला माफिया तथा ठेकेदारों से करोड़ों रुपया    लेकर अपने सीएमडी और निदेशक को पैसे पहुंचाते हैं,इसके बदले में इन अधिकारी को मनमानी करने का छूट मिल जाता है !इसलिए कोल कंपनियों  के उच्च स्तरीय अधिकारियों पर सी.बी.आई. का शिकंजा होना चाहिए  और भ्रष्ट पदाधिकारियों को जेल में डालना चाहिए, तब ही कोयले की लूट पर लगाम लग सकता है !
इस संबंध में कहना है कि रांची, रामगढ़ और चतरा जिले के कोयला माफियाओं और पुलिस अफसरों की मिलीभगत की जांच सीआईडी करेगी। लातेहार के बालूमाथ से कोयला माफियाओं के द्वारा कोयला चोरी कर उत्तर प्रदेश, बिहार, जमशेदपुर और आदित्यपुर समेत कई जिलों में भेजे जाने के मामले में डीजीपी एमवी राव ने सीआईडी जांच के आदेश दिए हैं। डीजीपी के आदेश पर आईजी मुख्यालय (मानवाधिकार) नवीन सिंह ने सीआईडी एडीजी को पत्र लिखा है। सीआईडी इस मामले में बालूमाथ थाने में दर्ज कांड संख्या 126/2020 की जांच करेगी।

लातेहार के बालूमाथ थाना में कोयला चोरी को लेकर दर्ज केस की जांच रिपोर्ट एसपी प्रशांत आनंद ने डीजीपी सहित अन्य अधिकारियों को भेज दी है. रिपोर्ट में लिखा है कि इस मामले में गिरफ्तार लोगों के बैंक खाते इसकी पुष्टि करते हैं कि नियमित रूप से कोयला माफियाओं के बैंक खाते से करोड़ों रुपये के लेन-देन हुए हैं. हालांकि, पुलिस संबंधित खातों का सत्यापन नहीं कर सकी और यह मामला सीआइडी को ट्रांसफर हो गया है. यह भी पता चला है कि पुलिस के कुछ अफसरों ने भी कोयला माफियाओं से बड़ी रकम ली है.
सीसीएल के पदाधिकारियों ने बताया है कि ओसीपी माइनिंग एरिया से बालूमाथ क्षेत्र के अलावा अगल-बगल के जिले रामगढ़, रांची, चतरा के कोयला माफिया कोयले के कारोबार में शामिल हैं. साक्ष्य के आधार पर केस में संलिप्त कोयला माफिया मिथुन साव, चेतलाल और पवन कुमार की गिरफ्तारी की गयी.
ऐसे होता था अवैध कारोबार : आरोपियों ने बताया है कि स्थानीय पुलिस पदाधिकारियों, सीसीएल के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से कोयले का अवैध कारोबार होता था. कोलियरी के बाहर ट्रक को कोई पकड़ नहीं सके, इसलिए वे लोडिंग, कांटा, जीएसटी और परिवहन से संबंधित फर्जी कागजात तैयार कराते थे. आरोपियों के मोबाइल को देखने से भी स्पष्ट होता है कि पुलिसकर्मियों एवं कोयला माफियाओं के बीच कारोबार से संबंधित मैसेज का आदान-प्रदान होता था. डालटेनगंज निवासी संतोष मिश्रा अवैध कोयला ढुलाई के लिए परिवहन संबंधी फर्जी पेपर माफियाओं को उपलब्ध कराता था.

A view of headquarters of Central Coalfields Limited, Darbhanga House, Ranchi

राजेश मंडल ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि कोयला के अवैध कारोबार में लगे माफिया पहले कोयला लोड ट्रक का नंबर मैसेज एवं व्हाट्सएप से राजेश मंडल और राहुल के जरिया एसडीपीओ के पास भेजते थे. एसडीपीओ से अनुमति मिलने के बाद इन ट्रकों में कोयला लोड कर एसआइएसएफ, सीसीएल के सिक्योरिटी गार्ड और चेक पोस्ट पर तैनात कर्मियों की मिलीभगत से वहां से निकल जाते थे.
इन बिंदुओं पर अनुसंधान की अनुशंसा की है एसपी ने : केस में तत्कालीन थाना प्रभारी, पूर्व के थाना प्रभारियों एवं तत्कालीन एसडीपीओ की संलिप्तता सामने आ रही है. केस में जब्त एक पे लोडर पूर्व थाना प्रभारी सुभाष पासवान के रिश्तेदार के नाम से होने की सूचना है. सीसीएल के पदाधिकारियों की शामिल होने की संभावना है. इस बिंदु पर अनुसंधान करना जरूरी है.
अब तक के अनुसंधान में काफी मात्रा में रुपयों के लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं. इसका पूर्ण सत्यापन और साक्ष्य संकलन भी आवश्यक है. अभियुक्त अमित कुमार केसरी के कुजू स्थित कार्यालय और संतोष कुमार मिश्रा के रांची के अरगोड़ा स्थित कार्यालय से कोयला के अवैध परिवहन और अवैध दस्तावेज बनाने के सबूत मिले हैं. जिससे यह पता चलता है कि कोयला के इस कारोबार में इंटर स्टेट गिरोह शामिल है. जिसके पूरे नेटवर्क के बारे में पता लगाने की आवश्यकता है
दूसरी ओर ईसीएल की लापरवाही के कारण झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में कोयले की तस्करी हो रही है। पूरे मामले में ईसीएल की भूमिका लापरवाही भरी है। वहीं, पश्चिम बंगाल के वीरभूम इलाके में रहने वाले सराफत खान जिसे डॉन भी कहा जाता है, कोयला तस्करी में उसकी भूमिका बतायी गई है।

ecl bakya

पुलिस मुख्यालय को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि कथित डॉन कपिस्ता माइंस, गर्दभा माइंस, चुरूलिया, राखाकुड़ी, मदनपुर, कपिस्टा, जामग्राम, डेसरमोहन, बाड़काला, काकड़तल्ला, फरीदपुर, घोडांग, जामुड़िया, बजदीपुर, पांडेश्वर के पास से सुबह-सुबह कोयला चोरी करवाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कोयला तस्करी के पैसे से बाराबनी का एक कोयला तस्कर दीना बाउरी रेनाकुड़ा घाट पर बाराबनी चेक पोस्ट के पास पेट्रोलपंप बनवा रहा है।
कैसे लापरवाही भरी है ईसीएल की भूमिका: जामताड़ा के नाला में 1990 के दशक में ओपन कास्ट माइंस करके ईसीएल ने पलास्थली और कास्ता में खादानों को बंद कर दिया था। लेकिन ईसीएल ने अधिगृहित भूमि को चिन्हित कर अबतक स्थानीय प्रशासन को मुहैया नहीं कराया और ना ही ईसीएल ने इलाके में सुरक्षा प्रदान किया। ऐसे में गढ्ढों के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। नाला में कास्ता, पलास्थली में वन विभाग व रेलवे की भी जमीन है। बंद कोयला खादानों में गैरमजरूआ जमीन भी है, जहां से कोयले का अवैध उत्खनन हो रहा है। इलाके में ईसीएल के खनन के कारण कृषियोग्य भूमि खत्म हो चुकी है। लेकिन ईसीएल इस इलाके में सीएसआर की गतिविधियां भी नहीं चला रहा।
डीसी से मांगी गई है डोजरिंग के लिए फोर्स : जामताड़ा एसपी अंशुमन कुमार ने इस मामले में मुख्यालय व डीसी जामताड़ा को लिखे पत्र में बताया है कि कोयला चोरी रोकने के लिए कास्ता, पलास्थली के आसपास के इलाकों में गहरे गढ्ढे की वन विभाग और ईसीएल कंपनी के द्वारा नियमित डोजरिंग की आवश्यकता है। एसपी ने लिखा है कि इलाके में नियमित रूप से सीआईएसएफ और ईसीएल के बलों की प्रतिनियुक्ति की आवश्यकता है। सीमावर्ती इलाकों में तस्करी रोकने के लिए भी बंगाल से मदद मांगी गई है। वहीं, अवैध उत्खनन रोकने के लिए स्थानीय नागरिकों के लिए वैकल्पिक रोजगार देने की मांग भी एसपी ने की है।

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