प्रवासी मजदूरों  के खून से सड़क लाल———–

अरुण कुमार चौधरी

आज सुबह ही यूपी के   औरैया में  24 प्रवासी मजदूरों का देहांत हो गया! अब तो इसको हम देहांत नहीं कहे, तो अच्छा होगा, क्योंकि यह  प्रवासी मजदूरों की पिछले 2 महीनों से मोदी सरकार की नाकामी के कारण हत्या हो रही है! मोदी सरकार अहंकार में डूबा हुआ है, इसलिए इसकी सारी कार्यशैली अहंकार और घमंड से भरा रहता है !इस सरकार में मजदूरों और गरीबों के प्रति कोई संवेदना नहीं है,  मोदी जी     केवल मजदूरों और गरीबों को  त्याग   और तपस्या की बातें  कर ज्ञान देते हैं, क्योंकि यह प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को समाधान नहीं करना चाहते हैं! इनके भाजपा के सारे मंत्री तथा प्रवक्ता सुबह से शाम तक या तो वह हिंदू- मुस्लिम की एंगील को खोजते रहते हैं या फिर मोदी जी की लोकप्रियता को गोदी मीडिया द्वारा प्रचारित करने के लिए लगे रहते हैं! इस तरह की सरकार पिछले 70 सालों में नहीं देखा गया की काम कम केवल भाषण बाजी से जनता को मुद्दा से भटकना    और सत्ता   में बने   रहना, जब भी कोई इस तरह की घटनाएं होते हैं उस समय ट्विटर पर    दुख जाहिर करने के लिए  बाढ़   आ जाता है और  और वह पानी की    बुलबुला के   तरह दो-तीन घंटे के बाद ठंडे हो जाते  है, क्योंकि मोदी सरकार जानता है कि इन गरीबों से  वोट  नहीं मिलते हैं और इसलिए इनकी बातों को अनसुनी कर देते हैं! ऐसे तो हम लोग शुरू से ही जानते हैं की भाजपा एक पूंजीपति पार्टी है, यह अंबानी- अदानी  के कामों में दिलचस्पी रखते हैं, क्योंकि यही   धन्ना से  बीजेपी को   बड़ी मोटी रकम में चंदे का पैसा  देते    है और इसी पैसे से भोली भाली जनता को  ठगते  रहते हैं  हालांकि इनकी पोल खुलना शुरू हो गया और धीरे-धीरे गरीबों, दलितों , मुसलमानों और पिछड़ों में  व्यापक असंतोष फैलते  जा रहा है, जोकि आने वाले दिनों में  पूरी तरह से मोदी विरोधी झलक देखने को मिलेगा!

इस संबंध में जानकारी है किउत्तर प्रदेश के औरेया में प्रवासी मजदूर एक हादसे का शिकार हो गए, जानकारी के मुताबिक इस हादसे में 24 मजदूरों की मौत हो गई. ट्रक में सवार होकर ये मजदूर हरियाणा और राजस्थान से अपने गांवों की तरफ पलायन कर रहे थे. ज्यादातर मजदूर पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के बताए जा रहे हैं. कई मजदूर गंभीर रुप से घायल हो गए हैं. इस भीषण भिड़त पर पीएम मोदी ने दुख जाहिर किया है.

.कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के बाद बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर अपने घरों की तरफ लौट रहे हैं. ट्रेन और बसों की व्यवस्था बंद होने के कारण ये प्रवासी हाइवे पर पैदल, साइकिल, रिक्शा या फिर ट्रकों की मदद से अपने गांवों तक पहुंच रहे हैं लेकिन इससे होने वाले हादसों में बढ़ोतरी हो गई है. पिछले कुछ दिनों में कई प्रवासी मजदूर इन्हीं हादसों के शिकार हो चुके हैं.

दूसरी ओर म.प.मेंसुबह उत्तर प्रदेश में भयानक हादसे के बाद अब मध्य प्रदेश से भी एक भीषण सड़क हादसे की जानकारी सामने आ रही है. इस हादसे में 6 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई है. जानकारी के अनुसार सागर कानपुर मार्ग के छानवीला थाना अंतर्गत निवार घाटी सेमरा पुल के पास मजदूरों से भरा एक ट्रक पलट गया है, इस दुर्घटना में 19 मजदूरों घायल हो गए हैं वहीं 5 की हुई मौत हो गई है. इसके अलावा कुछ घायल मजदूरों की स्थिति गम्भीर भी बताई जा रही है.. ज्यादातर मजदूर महाराष्ट्र से मजदूर बस्ती की ओर जा रहे थे.इस घटना में मां के शव के पास बच्चे बिलख रहे हैं,इससे ज्यादा हृदयविदारक क्या होगा

 मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है  कि   अदालत ने प्रवासी श्रमिकों की पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा, “पिछले एक महीने से मीडिया में प्रवासी मजदूरों की दिख रही दयनीय स्थिति को देखकर कोई भी अपने आंसुओं को नहीं रोक सकता है.” न्यायमूर्ति एन किरुबाकरन और न्यायमूर्ति आर हेमलता की पीठ ने कहा, ‘‘यह मानवीय त्रासदी के
अलावा कुछ नहीं है…”
  मोदीजी, कब तक प्रवासी मजदूरों  के खून से सड़क लाल  होती  रहेगी   ——-

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