बिहार के प्रवासी मजदूरों को मिला एक फरिश्ता

अरुण कुमार चौधरी

इस समय पूरे भारत  में   प्रवासी मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है,

भारत ने 2020 में अपने ही प्रवासी श्रमिकों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया है, वैसा न तो पिछली किसी सरकार ने अपने यहां, न दुनिया में कहीं भी कभी किसी सरकार ने किया है। ये मजदूर अब कभी इस सरकार और उन लोगों को माफ करने वाले नहीं हैं जिन्हों ने उनके साथ ऐसा किया।

बाइबल में किस्सा है कि मिस्र में गुलामों की तरह रहे लोगों को जब दासता से मुक्त कराया गया, तो वे लोग मिस्र से इजरायल भारी संख्या में भागे। उनका यह कूच एक तरह से जंजीरों को तोड़ने और जान बचाकर भागने की तरह था। आज जो देश भर में अपने गांवों की ओर जाते श्रमिक दिख रहे हैं, उसकी तुलना उस कूच से ही की जा सकती है। हालांकि, ये हमारे अपने लोग हैं, उन्हें कोई दास बनाकर कहीं नहीं रखा गया था। वे भी उसी तरह भारत के नागरिक हैं, जिस तरह समाज के शेष विशिष्ट वर्गों के लोग। फिर भी, इस घटना ने देश विभाजन के समय हुए सामूहिक विस्थापन को भी पीछे छोड़ दिया है।मार्मिक उदाहरणों की कोई कमी नहीं है। किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर दिन-रात जाती भीड़ के किसी भी व्यक्ति से बात कीजिए, आपको समझ में आएगा कि लोगों का विश्वास किस तरह दरक गया है। अनंत कथाएं हैं- बच्चे, जवान, बूढ़े, महिला, पुरुष- सब बता रहे हैं कि उन्होंने क्या-क्या भोगा, उनका भरोसा किस तरह टूट गया और वे किस तरह अपना जीवन नए ढंग से जीने को सोच रहे हैं।

ऐसे तो इसकी चर्चा हमने कई बार आपके सामने प्रस्तुत किया है, परंतु आज मैं बिहार में आए हुए प्रवासी मजदूर की व्यथा को पहले रख रहा हूं उसके बाद  बिहार के प्रवासियों के लिए एक अद्भुत फिल्म स्टार गरीब प्रवासियों को बसों से  अपने खर्चे पर बिहार भेज रहे हैं,जोकि मानवता का अनोखा मिसाल है!

पहले मैं बिहार में प्रवासी मजदूरों के साथ  क्वारेंटाइन सेंटरों में कुव्यवस्था का उल्लेख करूंगा! पिछले दिनों में क्वारेंटाइन सेंटरों में   भारी अव्यवस्था देखी गई है!बिहार में क्वारेंटाइन सेंटरों में कुव्यवस्था के वीडियो लगातार वायरल हो रहे, बलिया अनुमंडल के नूर जमापुर में भोजन नहीं दिया गया,प्रशासन चाहे लाख दावे कर ले लेकिन क्वारेंटाइन सेंटरों से लगातार कुव्यवस्था की तस्वीरें आ रही हैं जो जिला प्रशासन पर सवाल खड़ा कर रही हैं. जिले के दो क्वारेंटाइन सेंटरों से वायरल हुए वीडियो जिला प्रशासन की पोल खोलने के लिए काफी हैं.

बिहार : क्वारेंटाइन सेंटर में भोजन नहीं देने का आरोप, थाली बजाकर विरोध प्रदर्शन

क्वारेंटाइन सेंटर में विरोध प्रदर्शन करते हुए लोग.

पहला वीडियो बलिया अनुमंडल के नूर जमापुर का है जहां क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे लोगों ने प्रशासन पर समय से भोजन नहीं देने का आरोप लगाया है तथा थाली बजाकर अपना विरोध प्रदर्शन किया है. वहीं दूसरा वीडियो बखरी अनुमंडल का है जहां क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे लोगों ने प्रशासन द्वारा घटिया भोजन परोसने का आरोप लगाया है.

आलम यह है कि लोग अब भोजन करने से भी कतराते नजर आ रहे हैं. साथ ही साथ लोगों का कहना है कि यदि उनके घर से खाना नहीं आएगा तो वे लोग भूखे ही रह जाएंगे. इस दौरान क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे लोगों से उनके परिजनों का मिलना भी लगातार जारी है.

बिहार के क्वारंटाइन सेंटर में पानी भरने को लेकर चले लाठी-डंडे, कई लोग घायल

पानी भरने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया था

 

बिहार लौट रहे प्रवासी मजदूरों को क्वारंटाइन सेंटर में रखा जा रहा है. अब तब इन पंचायत और ब्लॉक स्तर के केंद्रों पर तीन लाख से अधिक लोग रह रहे हैं, लेकिन कई जगहों पर व्यवस्था में अभाव और बद-इंतजामी की शिकायत भी हर दिन मिल रही है. ऐसी ही एक घटना बीते दिन समस्तीपुर जिला स्थित सिंघिया फुलहारा क्वारंटाइन सेंटर में देखने को मिली. इस सेंटर में लगभग 150 प्रवासी मजदूरों को रखा गया है. सेंटर में पानी का अभाव है. शनिवार को पानी की गाड़ी आने पर पानी के लिए लोगों ने एक-दूसरे पर लाठी-डंडे चलाना शुरु कर दिया. इस घटना में कई लोग घायल हो गए हैं. बताया जा रहा है कि पानी भरने को लेकर दो पक्षो में लड़ाई हो गई और मारपीट होने लगी. पुलिस के आने के बाद मामला शांत हुआ.

वर्तमान में बिहार सरकार द्वारा 6,209 ब्लॉक स्तर पर वारंट विंसेंट चल रहे हैं, जिसमें  3,53000 से ज्यादा लोग रह रहे हैं. इसके अलावा सीमावर्ती जिलों में भी 21 ऐसे राहत केंद्र चल रहे हैं, जिसमें 5,327 लोग  रुके हुए . हैं !

इस धरती पर जब -जब मानवता के साथ अन्याय हुआ है, तब- तब भगवान मदद करने के लिए एक फरिश्ता के रूप में इंसान प्रगट कर देते हैं और वह बॉलिवुड एक्टर सोनू सूद  है। फिल्मों में नेगेटिव रोल अदा करने वाला सोनू सूद असल जिंदगी में असली हीरो वाला किरदार निभा रहा है।सोनू सूद ने प्रवासी श्रमिकों को घर पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। वे मुंबई से प्रवासियों को बस के माध्यम से घर पहुंचाने में लगातार मदद कर रहे हैं। काम ठीक से हो, इसके लिए सोनू सूद 18-18 घंटे चीजों को मॉनिटर करते हैं। इसके साथ ही वह अपने ट्विटर हैंडल से जरूरतमंद लोगों को रेप्लाई भी कर रहे हैं।

सोनू सूद ने प्रवासी श्रमिकों को घर पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। वे मुंबई से प्रवासियों को बस के माध्यम से घर पहुंचाने में लगातार मदद कर रहे हैं। काम ठीक से हो, इसके लिए सोनू सूद 18-18 घंटे चीजों को मॉनिटर करते हैं। इसके साथ ही वह अपने ट्विटर हैंडल से जरूरतमंद लोगों को रेप्लाई भी कर रहे हैं

सोनू सूद से ट्वीटर पर एक मजदूर ने मदद मांगी जिसके बाद सोनू ने जो जवाब दिया उसकी हर कोई तारीफ कर रहा है। दरअसल, मजदूर ने सोनू से कहा कि वह पिछने 16 दिन से पुलिस चौकी के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन हम लोगों का काम नहीं हो पा रहा है। इस पर सोनू ने रिप्लाई दिया, ‘भाई चक्कर लगाना बंद करो और रिलेक्स करो। दो दिन में बिहार में अपने घर का पानी पियोगे। डिटेल भेजो।

एक और शख्स ने सोनू सूद से मदद मांगते हुए लिखा, ‘सर हम लोग भी मुंबई में फंसे हैं, बिहार जाना है। पुलिस चौकी में फार्म भरा है। अभी तक कॉल नहीं आया।’ इस पर सोनू सूद ने जवाब दिया, ‘आप अपनी जानकारी भेजिए। मां बाप से मिलने का समय आ गया है मेरे दोस्त।’एक और व्यक्त‍ि ने ट्वीट कर सोनू से मदद मांगी। उसने लिखा- सर प्लीज ईस्ट यूपी में कहीं भी भेज दो सर, वहां से पैदल जाएंगे अपने गांव सर।’ इसपर देख‍िए सोनू की दिलदारी। सोनू ने लिखा- ‘पैदल क्यों जाओगे दोस्त? नंबर भेजो’।

एक ट्वीट करते हुए सोनू से मदद मांगी। उसने लिखा, कृपया मदद करे, ये लोग बहुत परेशान हैं और अपने गांव जाना चाहते हैं, कई बार थाने पर चक्कर लगा चुके हैं सब मगर कोई सुनवाई नहीं हो पा रही हैं। कृपया इनकी कुछ मदद कर जिससे कि ये सब अपने गांव जा सके। सोन सूद ने लिखा, सुनवाई हो गयी मेरे दोस्त। थोड़ा सब्र…फिर गांव के खेत खलियान। डिटेल्स भेजो।

पहले सोनू सूद प्रवासी श्रमिकों की मदद के लिए जुहू स्थित अपना 6 मंजिला होटल खोल दिया था। ताकि वहां कोविड-19 मरीजों की देखभाल करने वाले मेडिकल स्टाफ रह सकें। इसके अलावा कई तरह से सोनू सूद लोगों की मदद कर रहे हैं।इसके पहले जब देश में लॉकडाउन लगा तो उन्होंने अपने पिता शक्ति सागर सूद के नाम पर एक स्कीम लॉन्च की थी, जिसके तहत वो रोज 45 हजार लोगों को हर रोज खाना खिला रहे थे।

 ऐसे तो  सूद से भी से भी कई बड़े-बड़े  महानायक तथा कलाकारों से मुंबई नगरी भरा हुआ है जो कि अभी  केवल टीवी पर आकर करोना से लड़ने के लिए लंबे- लंबे लेक्चर  तथा हाथ धोने की  बात कर अपना फर्ज पूरा कर रहे हैं तथा विज्ञापन से करोड़ों रुपए कमा रहे हैं

सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस समय बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने कसम खा लिया है कि हम केवल प्रवासी मजदूरों के साथ छल- कपट  करते रहेंगे !

बस एक मजदूर है-———-

पसीने से तर-बतर,
घर से निकल दोपहर,
जा रहा है..
उसका क्या कसूर है?
क्योंकि वो बस एक मजदूर है,
बस यहीं उसका कसूर है,
                                                                                          निवेदन
ऐसे तो हजारों पाठकों का भरपूर सहयोग मिल रहा है, जिसके कारण हम अपनी सच्ची पत्रकारिता को आगे बढ़ा रहे हैं !इसी क्रम में प्रबुद्ध पाठकों से आग्रह है कि हम भूखे , प्यासी, नंगे पैर, हताश और निराश प्रवासी मजदूरों की स्थिति को प्रस्तुत करता हूं,! इसमें कुछ त्रुटियां हो सकती है, जिसे आप हमें समय-समय पर अवगत करा सकते हैं और आपका सुझाव मेरे लिए बहुत ही मूल्यवान होगा!
इस संबंध में कहना है कि अगर मेरी प्रस्तुति अच्छा लगे, तो आप अपने मित्रों, परिवारजनों तथा बुद्धिजीवियों को अधिक से अधिक इस प्रस्तुति को अग्रसारित करते रहें और हमें हौसला बढ़ाते रहें ।
                                                                                                                                                                                                                      आपका
                                                                                                                                                                                                              अरुण कुमार चौधरी

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