भारत के प्रवासी मज़दूरों की यह अंतहीन दुःख दर्द ——–

अरुण कुमार चौधरी

इस समय पूरे विश्व में कोरोना संक्रमण के कारण भारी संकट हो गया है. ऐसे तो कई देश अपने गरीब जनता को खासकर बेरोजगारों को बड़ी-बड़ी पैकेज दिया है! विदेशों में सामान्यतय: अपनी जनता से प्रधानमंत्री झूठ नहीं बोलते हैं,, परंतु हमारे यहां पिछले 6 वर्षों से नरेंद्र मोदी लोगों को अपने शब्दों के मायाजाल में फंसा कर झूठ पर झूठ बोलते जा रहे हैं! जबकि इस समय शताब्दी के भयानक संक्रमण में अपनी नाकामी को छिपाने के लिए झूठे पर झूठे जुमले जनता के बीच में फेंक रहे हैं और देश का करीबन 90% मीडिया हाउस टीवी मोदी के झूठे जुमले का प्रचार कर रही है और सामने का जनता अपनी बेबसी तथा संवेदनहीन सरकार के कारण अपना जीवन घुट- घुट कर मर रहे हैं- जी रहे हैं! झूठे जुमले के कारण यानी 20 लाख करोड़ पैकेज एक झूठा और फरेब है! इसमें जनता को सीधे तौर पर आंख में धूल झोंका जा रहा है! यह यह राहत पैकेज नहीं है, बल्कि यह एक लोन मेला पैकेज है! जिसमें हमारे लघु उद्योग ,किसान एवं छोटे-छोटे व्यापारी को लोन देने के लिए सरका  बैंकों में व्यवस्था की है ,जबकि इस समय पूरा का पूरा सिस्टम ध्वस्त और पस्त हो गया है !

अभी बेबस मजदूर को तत्काल राहत की जरूरत है , परंतु मोदी सरकार सिर्फ जुमला बाजी की बात कर रहे हैं!अभी निम्न मध्यमवर्गीय परिवार लोगों के पास रोजमर्रा की चीजें नहीं है ,और इनको किसी भी तरह का भी राहत नहीं दिया जा रहा है,इसके साथ साथ प्रवासी मजदूरों और गरीबों को सिर्फ 5 किलो चावल 2 किलो गेहूं तथा 1 किलो चना देकर देकर एक झुनझुना हाथों में थमा दिया है! इस समय सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूरों की स्थिति चिंताजनक है ! प्रवासी मजदूर गठरी,बच्चे को कंधे में रखकर तथा गर्भवती पत्नी को एक  मामूली लकड़ी के दो पहिए वाले ठेला पर लेकर रात- दिन एक कर अपने गांव की ओर जा रहे हैं, परंतु रास्ते में ना कोई रोक रहा है और ना टोंक रहा है,पुलिस और प्रशासन कहीं-कहीं उन्हें भोजन का पैकेट देकर अपना खानापूर्ति कर रहे हैं!लगता है की सरकार प्रवासी मजदूरों कि कोई भी चिंता नहीं है इस संबंध में कहना है कि

रोजी-रोटी से दूर करोड़ों मजदूर आज शहरों में फंसे हुए हैं. लंबी कतारों में लगकर वे एक वक्त के भोजन का जुगाड़ कर रहे हैं. सैकड़ों किलोमीटर दूर पैदल चलकर वे अपने गांव पहुंचना चाहते हैं ताकि इस मुश्किल वक्त में परिवार के साथ रहें.

उन्हें नहीं पता कि उनके परिवार और बच्चों के आसपास अंधकार ने कितना भयानक रूप ले लिया है. सम्मान के साथ दो रोटी पा लेना इन मजदूरों के लिए कोरोना से भी बड़ी चुनौती बन गया है

.कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण पूरे देश में लॉककडाउन घोषित किया गया है. ऐसे में गरीब और मजदूर वर्ग के लोग अपने-अपने घरों को लौटने के लिए मजबूर हो गए हैं. हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें तेंदुए के पीछे-पीछे प्रवासी मजदूर सड़क पार करते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो को लेकर बॉलीवुड की मशहूर डायरेक्टर और स्क्रीन राइटर शगुफ्ता रफीक (Shagufta Rafique) ने ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा कि आदमी को आदमी से बचने की जरूरत है, जानवरों से नहीं. बॉलीवुड डायरेक्टर के इस ट्वीट को लेकर फैंस खूब कमेंट कर रहे हैं.

कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए एक तरफ़ सरकार ने लॉकडाउन लगाया तो दूसरी तरफ शहरों से गांवों की तरफ़ मज़दूरों का पलायन शुरू हुआ.

लॉकडाउन के कारण देश भर में रेल सेवा बंद है और सड़कों पर यातायात भी नहीं है. ऐसे में ये मज़दूर साइकिल पर या पैदल की अपने गाँवों की तरफ़ लौट पड़े हैं.

इसी साल 25 मार्च को लॉकडाउन लगने के बाद शुरू हुआ पलायन का ये सिलसिला अब भी थमता नहीं दिख रहा. हर रोज़ शहरों से हज़ारों की संख्या में मज़दूरों का पलायन जारी है.

लॉकडाउन का तीसरा चरण 17 मई तक है. हालांकि इसके बाद लॉकडाउन बढ़ेगा या नहीं इस पर अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है.

भारत के प्रवासी मज़दूरों की यह अंतहीन दुःख दर्द———–

 

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