झारखंड में सबसे अधिक एड्स का आंकड़ा हज़ारीबाग़ का रहा है

संजय सागर
विश्व समुदाय के लिए एड्स एक गंभीर बीमारी है इस बीमारी से बचने के लिए अब तक कोई बेहतर तरीका नहीं खोज हो पाया है। इस खतरनाक बीमारी से सावधान रहने के लिए एवं जागरूकता फैलाने के लिए
विश्व एड्स दिवस पूरी दुनिया में हर साल 1 दिसम्बर को प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।यह दिन सरकारी संगठनों, गैर सरकारी संगठनों, नागरिक समाज और अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा एड्स से संबंधित भाषण या सार्वजनिक बैठकों में चर्चा का आयोजन करके मनाया जाता है। हालांकि इस वर्ष कोविड-19 को लेकर पूरे तामझाम के साथ जागरूकता अभियान नहीं चलाया जाएगा, लेकिन सावधानी बरतते हुए इस जरूरत अभियान को जारी रखा जाएगा।ज्ञात हो कि संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ने साल 1995 में विश्व एड्स दिवस के लिए एक आधिकारिक घोषणा की जिसका अनुकरण दुनिया भर में अन्य देशों द्वारा किया गया। एक मोटे अनुमान के मुताबिक, 1981-2007 में करीब 25 लाख लोगों की मृत्यु एचआईवी संक्रमण की वजह से हुई। यहां तक कि कई स्थानों पर एंटीरेट्रोवायरल उपचार का उपयोग करने के बाद भी, 2007 में लगभग 2 लाख लोग (कुल का कम से कम 270,000 बच्चे) इस महामारी रोग से संक्रमित थे।
वर्ष 2013 के आंकड़े के अनुसार, झारखंड में करीब 23 हजार एचआइवी पॉजिटिव लोगों के होने का अनुमान था. इससे पहले सोसाइटी ने जुलाई 2012 तक इनमें से 11 हजार की पहचान की थी. एचआइवी जांच व अन्य तरीकों से शेष की खोज जारी थी. वर्ष 2014 में सबसे अधिक (3133) एचआइवी पॉजिटिव रांची में पाये गये थे. अब हजारीबाग सबसे आगे है.
सोसाइटी के अनुसार, एचआइवी पॉजिटिव होने का एक बड़ा कारण पलायन है. रोजगार के लिए दूसरे राज्य गये लोग जाने-अनजाने के दौरान इसकी चपेट में आ जाते हैं. एड्स से बचाव के लिए जेसैक जनजागरण के कई कार्यक्रम चलाता है. पॉजिटिव लोगों की पहचान के लिए राज्य के सभी जिलों में एचआइवी टेस्ट क्लिनिक है.
एचआइवी पॉजिटिव लोगों को सरकार की ओर से नि:शुल्क दवा दी जाती है. दवा एंटी रेट्रोवायवल ट्रीटमेंट सेंटर (एआरटीसी) से मिलती है. अभी राज्य भर में कुल पांच मुख्य एआरटीसी हैं, जिनके तहत 17 लिंक एआरटीसी हैं. मुख्य एआरटीसी में रिम्स रांची, एमजीएम जमशेदपुर, देवघर, हजारीबाग व गिरिडीह सदर अस्पताल शामिल हैं. अब चार नये मुख्य एआरटीसी बोकारो, चाईबासा, साहेबगंज व दुमका सदर अस्पताल में हैं.
1920 को विभिन्न एआरटी सेंटर में शिफ्ट किया गया रांची. रिम्स के एंटी रेट्रोवायरल ट्रीटमेंट सेंटर (एआरटी) में प्रतिमाह एड्स के 1500 मरीजों को दवा दी जाती है. रांची जिले के विभिन्न क्षेत्रों से मरीज दवा लेने आते हैं. एआरटी सेंटर के डाटा मैनेजर दिलीप कुमार ने बताया कि यहां 6600 एड्स पीड़ित पंजीकृत हैं. इनमें से 4680 एड्स पीड़ित को दवा दी गयी. वहीं पंजीकृत मरीजों में से 1920 को विभिन्न एआरटी सेंटर में शिफ्ट किया गया है. उन्हें वहां के एआरटी सेंटर से दवा दी जाती है. एड्स के मरीजों को फर्स्ट व सेकेंड लाइन की दवा दी जाती है. आवश्यकता पड़ने पर थर्ड लाइन की दवा भी मुहैया करायी जाती है.झारखंड राज्य सुरक्षा पेंशन योजना के तहत एआरटी सेंटर से एड्स पीड़ित मरीजों को एक हजार रुपये मासिक पेंशन भी दी जाती है. वहीं एड्स पीड़ित मरीज अगर टीबी से संक्रमित हो जाता है, तो उसकी दवा भी एआरटी सेंटर से दी जाती है. हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित मरीज को भी दवा देने की जिम्मेदारी एअारटी सेंटर की है. वहीं रिम्स प्रबंधन द्वारा डॉक्टरों व एएनएम को एड्स मरीजों के इलाज में सावधानी बरतने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है.जांच के लिए अब नहीं जाना पड़ता है कोलकाता : एड्स के मरीजों के लिए अत्याधुनिक जांच की सुविधा अब रिम्स के एआरटी सेंटर में ही उपलब्ध है. सीडीआर फोर जांच के बाद अगर मरीज को वायरल लोड की जांच की जरूरत पड़ती है, तो उनकी जांच रिम्स के एआरटी सेंटर में हो जाती है. पहले एड्स पीड़ितों को इस जांच के लिए कोलकाता जाना पड़ता

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