पूर्व मंत्री बंदी उरांव का निधन

राजनीतिक संवाददाता द्वारा
रांची: बिहार सरकार में मंत्री रहे पूर्व विधायक बंदी उरांव का निधन हो गया है। सोमवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर आदिवासी संगठन ने गहरा शोक व्यक्त किया है। बता दें कि वे पूरी ईमानदारी, योग्यता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ जिंदगी भर जल, जंगल, जमीन बचाने और झारखंड की अस्मिता सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष करते रहे। वो पूर्व IPS अधिकारी भी रह चुके हैं। इसके अलावा चार बार विधायक के साथ-साथ बिहार सरकार में मंत्री, जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष बाबा ने PESA कानून बनाने में महती भूमिका निभाई थी।बंदी उरांव ने नौकरी से त्यागपत्र देकर कार्तिक उरांव के प्रेरणा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. पेसा कानून को लेकर इन्होंने लंबा संघर्ष किया था. खासकर फुटबॉल उनका पसंदीदा खेल था. उनके पुत्र अरुण उरांव भी पुलिस अधिकारी रह चुके हैं जो अभी भाजपा में हैं. पुत्रवधू गीताश्री उरांव भी कांग्रेस के टिकट पर विधायक रह चुकी हैं.
वे ग्रामसभा के जबरदस्त वकालत करने वाले, बुढ़ादेव को स्थापित करने वाले, आदिवासी समाज के अग्रीम और बौद्धिक जगत के रूप जानने वाले के साथ झारखंड अलग राज्य के कर्मठता के साथ विचार प्रवाह करने वाले के रूप में जाने जाते थे। झारखंड के समाज में उनके काम की मौजूदगी सदा बनी रहेगी। बता दे बंदी बाबा सिसई विधानसभा के पूर्व विधायक छोटानागपुर संथालपरगना कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। 90 साल कि उम्र में 5 अप्रैल 2021 11 बजे रात को अंतिम सांस ली। उनका जन्म 16 जनवरी 1931 मे हुआ था. हेहल बगीचा टोली, Govt ITI और बस स्टैंड के नजदीक राँची झारखंड में हुआ था।
बंदी उरांव ने कहा था कि राज्य के राजनेता गांव नहीं जाते हैं. वह सिर्फ चुनाव में ही गांव जाते हैं, इसलिए उन्हें करप्शन कर धन जमा करना पड़ता है और चुनाव लड़ना पड़ता है. चुनाव में पैसे खर्च करने पड़ते हैं. मैं अपने समय में काफी कम संसाधनों से चुनाव लड़ता था और जीतता था. पैसे की बंदरबांट चुनाव में नहीं होती थी. जनप्रतिनिधियों द्वारा किये गये कार्यों का आकलन करते हुए जनता वोट देती थी और लोग जीतते थे.

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