हजारीबाग के प्रथम सांसद का संविधान सभा में महत्वपूर्ण योगदान

संजय सागर
बड़कागांव :संविधान निर्माण में हजारीबाग के तत्कालीन सांसद बाबू राम नारायण सिंह का महत्वपूर्ण योगदान था. जब संविधान निर्माण के लिए सभा हो रही थी, तो उस वक्त झारखंड के दलितों ,आदिवासियों एवं पिछड़े वर्गों के लिए विशेष सुरक्षा की मांग की थी.इतना ही नहीं झारखंड को अलग राज्य के दर्जा की मांग की थी.छोटानागपुर केसरी बाबू रामनारायण सिंह का योगदान अविस्मरणीय है। उनका जन्म 19 दिसंबर 1884 को चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड के तेतरिया गांव में हुआ था। देशभक्ति की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी हुई थी।
वे स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय राजनीतिक की एक स्तंभ थे। छोटानागपुर में अलग झारखंड की मांग सबसे पहले बाबू रामनारायण सिंह ने ही संसद में उठाई थी। स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी निभाने के दौरान बाबू रामनारायण सिंह को 1931 से लेकर 1947 तक अंग्रेजों ने आठ बार जेल भेजकर यातना दी.ब्रिटिश सरकार की इन पर कड़ी नजर रहती थी. 1934 में भूकंप के समय देश र| बाबू राजेंद्र प्रसाद समेत सभी स्वयंसेवकों और राजनीतिक बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया था. बाबू रामनारायण सिंह को उस समय भी जेल में कैद रखा गया. 1940 में रामगढ़ में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ.
बाबूरामनारायण सिंह के ही प्रयास से डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अधिवेशन के लिए रामगढ़ का चयन किया। मौलाना अबुल कलाम की अध्यक्षता में सम्पन्न हुए इस अधिवेशन के सफल आयोजन में बाबू रामनारायण सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण थी. छोटानागपुर केसरी बाबू रामनारायण सिंह 1946 में विधान सभा के सदस्य बने। आजादी के बाद जब संविधान निर्माण समिति का गठन डॉ. भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में हुआ, तो वे इस समिति के सदस्य मनोनीत हुए. उन्होंने संविधान सभा के निर्वाचित सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे 1950 से लेकर 1957 तक संसद के सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने एक प्रभावशाली सांसद की गरिमा का निर्वाह किया.सत्ता एवं विपक्ष सदस्य के रूप में उनकी भूमिका अत्यधिक रचनात्मक, प्रेरणादायक अनुकरणीय रही है। स्वराज प्राप्ति के बाद भी तथाकथित स्वराज सरकार ने 1956 में उन्हें दो महीने में मथुरा जेल में बंदी बनाए रखा. वे जवाहर लाल नेहरू की विदेश नीति से संतुष्ट नहीं थे. एक बार जवाहर लाल नेहरू को लिखे गए एक पत्र में उन्होंने कहा था- जब रोम जल रहा था, तो नीरो बंशी बजा रहा था.पंडित नेहरू ने इस पर उनसे यह स्पष्टीकरण मांगा था कि आपका नीरो से अभिप्राय नेहरू तो नहीं है.इसके जवाब में सिंह ने साफ शब्दों में कहा था कि हां, मेरा अभिप्राय नेहरू ही है.

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