दिशा रवि की बेल मोदी  और गोदी मीडिया के  मुंह पर जोरदार का तमाचा

अरुण कुमार चौधरी

कल ही दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सेशन जज श्री धर्मेंद्र राणा ने पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को 1 लाख रुपये की जमानत राशि जमा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उन्हें दो जमानतदार भी देने होंगे। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने आज मंगलवार को टूलकिट मामले में गिरफ्तार दिशा रवि की जमानत मंजूर कर ली है बेंगलुरु की पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को दिल्ली पुलिस ने  13 फरवरी को गिरफ्तार किया था। शनिवार को दिशा रवि की जमानत याचिका पर कोर्ट में सुनवाई थी जिसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार के लिए फैसला सुरक्षित कर लिया था। इस जमानत  से  मोदी ,शाह और गोदी मीडिया को मुंह पर जोरदार का तमाचा लगा है !इस तमाचा का कितना असर होगा यह तो  आगे ही पता चलेगा ! लेकिन इससे प्रमाणित हो गया है कि देश में बहुत से जजों, बुद्धिजीवियों तथा सामाजिक संगठन का जवीर अभी भी बचा हुआ है! मोदी के राज में अघोषित आपातकाल में बहुत से लोगों  की अभिव्यक्ति स्पष्ट तथा वेबाक बना हुआ है और  जिस तरह से देश में गोदी मीडिया दिशा रवि को आतंकवादी बनाने का   मुहीम चला रही है और दिशा की कैरियर को बर्बाद करने के लिए सभी तरह के हथकंडे अपना रहे थे, परंतु सत्य झुका नहीं और और खड़ा रहा !
इस जमानत पर पत्रकार रविश कुमार ने अपने ब्लाक में लिखा है कि
वही दिशा है. सिर्फ उसका नाम दिशा नहीं है बल्कि वाकई वह दिशा है. जब उसने 20 फरवरी को भरी अदालत में कह दिया कि किसानों की बात करना गुनाह है तो वह जेल में रहना चाहेगी. जेल के इसी डर से गांधी ने भारत को आज़ाद कराया था. दिशा गांधी नहीं है न हो सकती है मगर जेल के डर से अपनी पीढ़ी के नौजवानों को आज़ाद करा रही है. गोदी मीडिया के सहारे विश्व गुरु बनने का सपना देखने वाला भारत आज की रात फैसले की कापी पढ़ेगा जिसे जज धर्मेंद्र राणा ने कलमबंद किया है कि गुरु बना जाता है इंसाफ़ से. न्याय से और सत्य के साथ खड़े होकर, न कि झूठ का बाज़ार बिछाकर. सरकार के मंत्री नहीं पढ़ेंगे, गोदी मीडिया के एंकर नहीं पढ़ेंगे लेकिन आप जनता, आप नागरिक जज धर्मेंद्र राणा की लिखी बातों को पढ़ेंगे. आज नहीं पढ़ेंगे, कोई बात नहीं लेकिन जब यही सत्ता आपकी बेटी को दिशा की तरह झूठे मुकदमे में फंसाएगी तब यह फैसला याद आएगा.. दिशा रवि को ज़मानत मिल गई है. बल्कि जेल में डालकर डराने के खेल को आज नई दिशा मिली है.

दिशा रवि

इसी क्रम में अतिरिक्त सेशन जज से धर्मेंद्र राणा ने कहा है कि विचारों में मतभेद, असहमति, विचारों में भिन्नता और यहां तक कि घोर आपत्ति राज्य की नीतियों में वस्तुनिष्ठता लाने के पहचाने हुए और विधिक औज़ार हैं. एक उदासीन और बेहद विनम्र जनता के मुकाबले जागरूक और मुखर जनता एक स्वस्थ और मजबूत लोकतंत्र का संकेत है.
भारत की 5000 साल पुरानी सभ्यता कभी भी अलग अलग विचारों की विरोधी नहीं रही. इस सिलसिले में फैसले में ऋग्वेद के एक श्लोक को भी उद्धृत किया गया जिसका अर्थ है हमारे पास चारों ओर से ऐसे कल्याणकारी विचार आते रहें जो किसी से न दबें, उन्हें कहीं से बाधित न किया जा सके एवं अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों. सिर्फ़ मौखिक दावे के अलावा मेरे संज्ञान में ऐसा कोई सबूत नहीं लाया गया जो इस दावे की तस्दीक करता हो कि आरोपी या उनके कथित सह साज़िशकर्ताओं की शैतानी साज़िश के बाद किसी भी भारतीय दूतावास में किसी तरह की कोई हिंसा हुई हो.एडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा ने कहा, “मुझे नही लगता कि एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाना या किसी हानि न पहुँचाने वाले ‘टूलकिट’ का एडिटर होना कोई जुर्म है.”

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कोर्ट ने पुलिस की कहानी और दावों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस के कमजोर सबूतों के चलते एक 22 साल की लड़की जिसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है,उसे जेल में रखने का कोई मतलब नहीं है. मंगलवार को एक दिन की पुलिस रिमांड के बाद जब दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने टूलकिट मामले में आरोपी दिशा रवि को कोर्ट में पेश किया. पुलिस दिशा रवि को निकिता के सामने बिठाकर पूछताछ करने के लिए 4 दिन की पुलिस रिमांड मांग ही रही थी कि इसी बीच सेशंस कोर्ट से खबर आई कि दिशा की जमानत मंजूर कर ली गयी है.
इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि इस बात के भी कोई सबूत नहीं मिले कि रवि ने टूल किट पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को भेजा और इससे दुनिया के दूसरे लोगों तक अलगाववादी विचार फैला.कोर्ट ने ये भी कहा कि वो इस बात को समझते हैं कि इस तरह से किसी अपराध के लिए सबूत इकट्ठा करना मुश्किल है.”मुझे इस तथ्य के बारे में भी पता है कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और पुलिस और सबूत इकट्ठा करने की प्रक्रिया में है. जांच एजेंसियों ने मौजूद सबूतों के आधार पर (रवि को) गिरफ्तार किया लेकिन अब उन्हें महज शक के आधार पर किसी नागरिक की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.”
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा था कि आपके पास क्या सबूत है कि टूलकिट और 26 जनवरी को हुई हिंसा में कोई कनेक्शन है। इस पर दिल्ली पुलिस ने बताया था कि अभी जांच चल रही है। पुलिस ने कहा था कि भारत को बदनाम करने की ग्लोबल साजिश में दिशा भी शामिल है। इसके जरिए किसान आंदोलन की आड़ में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। दिशा ने न सिर्फ टूलकिट बनाई और शेयर की, बल्कि वह खालिस्तान की वकालत करने वाले व्यक्ति के संपर्क में भी थी। हालांकि, दिशा के वकील ने इन आरोपों को निराधार बताया था।

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दिशा रवि की बेल पर सोशल मीडिया:यूजर्स बोले- शाह और तानाशाह दोनों को समझना पड़ेगा कि ये गांधी का लोकतंत्र है, हिटलर का जर्मनी नहीं…
CartoonsByIrfan नाम के यूजर ने एक कार्टून शेयर किया है। इसका शीर्षक है..एक हानिरहित टूलकिट का संपादक होना कोई अपराध नहीं है। कार्टून में पुलिस वाला महिला (दिशा रवि) को शान से कोर्ट ले जा रहा है। तब उसकी मूंछे खड़ी हैं। वहीं, महिला के हाथ रस्सी से बंधे हैं और मुंह पर मास्क है। दूसरी ओर कोर्ट से निकलने के दौरान पुलिस वाला शर्म से चेहरा छुपाए हुए है। महिला के हांथ में रस्सी नहीं है। उसके मुंह पर कपड़े भी नहीं है। वह शान से बाहर निकल रही है।
सतीश आचार्य नाम के यूजर ने भी एक कार्टून शेयर किया है। इसमें एक महिला की आंख पर पट्टी और हाथ में कानून की किताब है। आंख पर पड़ी पट्‌टी के पास नेविगेट करते हुए कार्टून का शीर्षक दिया गया है.. ‘This toolkit still works’ यानी, ‘ये टूलकिट फिलहाल काम कर रहा है।’ इशारा कोर्ट की तरफ है कि, अदालत की आंख पर पट्‌टी है लेकिन वह काम कर रही है। कार्टून में महिला एक लड़की का हाथ पकड़े कोर्ट से बाहर निकल रही है। लड़की के हाथ में पौधा भी दिखाया गया है। वह चेहरे पर मुस्कान लिए कोर्ट से बाहर निकल रही है।.
दिशा रवि की बेल पर सोशल मीडिया:यूजर्स बोले- शाह और तानाशाह दोनों को समझना पड़ेगा कि ये गांधी का लोकतंत्र है, हिटलर का जर्मनी नहीं…

अडोल्फ़ हिटलर व्यक्ति नहीं मानसिकता है22 साल की क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि को गिरफ्तारी के 9 दिन बाद सशर्त जमानत मिल गई है। बेंगलुरु की रहने वाली दिशा पर किसान आंदोलन से जुड़ी वह टूलकिट बनाने और एडिट करने का आरोप है, जिसे क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने शेयर किया था। इस बीच दिशा की रिहाई को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने दिल्ली पुलिस और सरकार की खूब खिंचाई की। पढ़ें यूजर्स के रिएक्शन…
दिशा रवि के नाम से एक यूजर ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार पर भड़ास निकाली। उन्होंने लिखा, शाह और तानाशाह दोनों को ये समझना पड़ेगा कि ये गांधी का लोकतंत्र है, हिटलर का जर्मनी नहीं।
प्रीति चौधरी नाम की यूजर ने अक्षय कुमार की एक मूवी की फोटो शेयर करते हुए लिखा, दिशा रवि की जमानत के बाद राइट विंग के लॉयर।

cartoonsByIrfan नाम के यूजर ने एक कार्टून शेयर किया है। इसका शीर्षक है..एक हानिरहित टूलकिट का संपादक होना कोई अपराध नहीं है। कार्टून में पुलिस वाला महिला (दिशा रवि) को शान से कोर्ट ले जा रहा है। तब उसकी मूंछे खड़ी हैं। वहीं, महिला के हाथ रस्सी से बंधे हैं और मुंह पर मास्क है। दूसरी ओर कोर्ट से निकलने के दौरान पुलिस वाला शर्म से चेहरा छुपाए हुए है। महिला के हांथ में रस्सी नहीं है। उसके मुंह पर कपड़े भी नहीं है। वह शान से बाहर निकल रही है।
सतीश आचार्य नाम के यूजर ने भी एक कार्टून शेयर किया है। इसमें एक महिला की आंख पर पट्टी और हाथ में कानून की किताब है। आंख पर पड़ी पट्‌टी के पास नेविगेट करते हुए कार्टून का शीर्षक दिया गया है.. ‘This toolkit still works’ यानी, ‘ये टूलकिट फिलहाल काम कर रहा है।’ इशारा कोर्ट की तरफ है कि, अदालत की आंख पर पट्‌टी है लेकिन वह काम कर रही है। कार्टून में महिला एक लड़की का हाथ पकड़े कोर्ट से बाहर निकल रही है। लड़की के हाथ में पौधा भी दिखाया गया है। वह चेहरे पर मुस्कान लिए कोर्ट से बाहर निकल रही है

Pamela Goswami Know All About Bjp Youth Wing Leader Who Caught With Cocaine Before West Bengal Election Modelling Acting - पामेला गोस्वामी: मॉडलिंग, एक्टिंग के बाद राजनीति में एंट्री, जानें कौन ...

इकबाल सिंह सामरा नाम के यूजर ने दो तस्वीरें शेयर की हैं। पहली तस्वीर में दिशा रवि को एक बैग के साथ कचरा चुनते हुए दिखाया गया है। इसका शीर्षक है… ‘Youth india needs’ यानी, ‘युवा भारत चाहता है।’ वहीं दूसरी तस्वीर में पश्चिम बंगाल भाजपा यूथ विंग की लीडर पामेला गोस्वामी के साथ यूथ विंग के नेशनल प्रेसिडेंट सांसद तेजस्वी सूर्या को दिखाया गया है। इसका शीर्षक है… ‘Youth bjp needs’ यानी, ‘भाजपा के युवा चाहते हैं।’ पामेला हाल ही में कोलकाता में कोकिन के साथ गिरफ्तार हुई हैं।
ये बात अगर सरकारें समझ लें तो न जाने कितने लोग जेल जाने से बच जाएं! चूंकि दिशा रवि पर्यावरण कार्यकर्ता थीं तो उनको टूल किट वाले केस में गिरफ्तार किया गया नही तो बहुत सी सरकारी संस्थाएं हैं जो कानूनी पचड़ों में सरकार से असहमति रखने वालों को लपेट ही लेती हैं।

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आज 22 वर्ष की एक आम लड़की ने देश को एक नई दिशा प्रदान करी, दिशा रवि जो बिना किसी अपराध के 7 दिनों से तिहाड़ जेल में बंद थी आज उनसे वो लोग जरूर नजरे चुरा रहे है, जो सोशल मीडिया पर उस बेकसूर लड़की को दोषी ठहरा रहे थे, शर्म आनी चाहिए बीजेपी तानाशाही सरकार को और दिल्ली पुलिस को।

 

 

 

 

 

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