केजरीवाल  और भाजपा के बीच तकरार से कोरोना मरीज संकट में !

अरुण कुमार चौधरी

दुनियाँ भर में कोरोना संकट है और धीरे – धीरे भारत में से गंभीर होते   जा रहा है, परन्तु भाजपा और मोदी हर समय केवल वोट की गणना में लगा रहता है इसलिए देश में गैर भाजपा शासित प्रदेशों  में   केंद्र सरकार खुलेआम भेद -भाव कर रहा है !  परन्तु दिल्ली में केजरीवाल  और भाजपा  झूठ   बोलने में प्रतिस्पर्धा है!   इस   समय      कोरोना   संकट में केजरीवाल का  सफेद  झूठ   सामने आया ! चार माह पहले दिल्ली में  विधान सभा का चुनाव हुआ था, जिसमें  केजरीवाल  बड़ा – बड़ा  विज्ञापनों के    द्वारा  लोगों भ्रमित कर वोट ले लिया और इस समय अस्पतालों  का पूरा कच्चा चिठ्ठा सामने आगया!जानकारों का कहना है कि दिल्ली सरकार कोरोना से निपटने में नाकाम रही है और आख़िर में केंद्र सरकार को दख़ल देना पड़ा..”लगातार बढ़ रहे संक्रमण के आंकड़ों को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच तकरार को भी वजह माना जा रहा है.

Amit Shah speaks to all CMs; seeks views on lockdown extension ...

बी बी सी के अनुसार   दिल्ली में बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण के 3390 नए मामले सामने आए हैं. इसी के साथ कोरोना संक्रमण के कुल मामले 73780 हो गए हैं.दिल्ली सरकार का कहना है कि राजधानी में कोरोना के मामले इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि टेस्ट की संख्या तीन गुना कर दी गई है.शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ”पहले जब पाँच से छह हज़ार टेस्ट रोज़ाना होते थे तो कोरोना पॉज़िटिव मामलों की संख्या क़रीब 2000 के आस-पास रहती थी. लेकिन अब एक दिन में 18000 टेस्ट हो रहे हैं तब कोरोना के मामले 3000 से 3500 के क़रीब हैं. यानी टेस्ट बढ़े हैं लेकिन कोरोना पॉज़िटिव मामले बहुत ज़्यादा नहीं बढ़े

अरविंद केजरीवाल का कोरोना टेस्ट ...

जबकि दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के विधायकों का मानना है कि उनकी सरकार इस संकट से निपटने की हर संभव कोशिश कर रही है. हालांकि केंद्र सरकार की ओर से थोड़ी अड़चनें आने और उपराज्यपाल की ओर से कुछ नियमों को बदलने को लेकर वो सवाल उठाते रहे हैं. ख़ासकर होम आइसोलेशन और कोविड केयर सेंटर के मुद्दे पर दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल आमने-सामने दिखे. गुरुवार को आख़िरकार केंद्र ने दिल्ली सरकार की होम आइसोलेशन जारी रखने की माँग को मान लिया.

हालांकि यह इकलौता मुद्दा नहीं है जिसमें दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच की मतभेद दिखा हो. दिल्ली सरकार ने एक फैसला लिया जिसमें उन्होंने दिल्ली के अस्पतालों को सिर्फ दिल्ली के कोरोना मरीज़ों के इलाज के लिए रिज़र्व करने की बात कही. लेकिन एक दिन बाद ही उपराज्यपाल ने इस फैसले पर रोक लगा दी. केजरीवाल सरकार के इस फैसले का राजनीतिक दलों ने भी विरोध किया था और जब उन्होंने जनता का रुख भी इस मामले में अपने साथ नहीं दिखा तो उन्होंने बिना विरोध के एलजी का फैसला मान लिया.

Delhi Corona cases: Delhi overwhelmed by Covid-19 cases after city ...

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हों या बीजेपी के प्रवक्ता, किसी ने भी दिल्ली की सरकार को कोसने का मौका नहीं छोड़ा. बीजेपी प्रवक्ताओं ने जहां टीवी चैनलों पर दिल्ली सरकार की योजना की आलोचना की वहीं केंद्रीय गृह मंत्री ने ट्विटर पर दिल्ली में कोरोना की स्थिति को लेकर अपना रुख और एक्शन स्पष्ट किया

अमित शाह ने हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक में हालात का जायजा लिया था और कई फैसले भी लिए थे. दिल्ली में कोविड के सेंटर बनाने और आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था को लेकर उन्होंने फैसला लिया.

अमित शाह ने ट्वीट करते बताया कि आर्म्ड फोर्सेज़ के लोगों को रेलवे कोच में रखे गए कोविड मरीज़ों का ध्यान रखने के लिए तैनात किया गया है. ज़रूरत के आधार पर 8000 अतिरिक्त बेड लगाए जा चुके हैं.

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा कि दिल्ली में एक हज़ार बेड वाले अस्पताल की व्यवस्था केंद्र सरकार कर रही है. इसमें 250 बेड आईसीयू वाले होंगे. अमित शाह ने बताया कि इस अस्पताल को डीआरडीओ और टाटा ट्रस्ट की मदद से बनाया जा रहा है. आर्म्ड फोर्सेज़ के जवान इसकी देखभाल करेंगे. यह कोविड केयर सेंटर 10 दिनों में तैयार हो जाएगा.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को 10 हज़ार बेड वाले कोविड केयर सेंटर के निरीक्षण का न्योता दिया तो उन्होंने ट्विटर पर एक बार फिर केजरीवाल को जवाब दिया.

अमित शाह ने ट्वीट किया, ”प्रिय केजरीवाल जी, तीन पहले हुई हमारी मीटिंग में यह पहले ही तय हो चुका है और गृह मंत्रालय ने 10 हज़ार बेड वाले कोविड केयर सेंटर को चलाने का काम आईटीबीपी को सौंप दिया है. काम तेज़ी से चल रहा है और इसका एक बड़ा हिस्सा 26 जून से चालू हो जाएगा.”

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक प्रदीप सिंह का मानना है कि दिल्ली की स्थिति के लिए केजरीवाल सरकार ज़िम्मेदार है क्योंकि उन्होंने हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर की दिशा में ज़रूरी काम नहीं किया.

वो कहते हैं, ”दिल्ली की ज़िम्मेदारी तो दिल्ली सरकार की थी. लॉकडाउन इसलिए किया गया था ताकि कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके यानी संक्रमण को फैलने से रोका जा सके. दूसरा उद्देश्य था कि राज्य सरकारों को अपनी तैयारियां पूरी करने के लिए समय मिल जाए और वो अपना हेल्थ इनफ्रास्ट्रक्चर सही कर लें. जिससे लॉकडाउन खुलने बाद जो मरीज़ आएं, उनको इलाज मिल सके

हालांकि राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे इन बातों से सहमत नहीं नज़र आते. उनका मानना है कि भले ही दिल्ली में कोरोना की स्थिति बिगड़ी हो और संक्रमण के आंकड़े बढ़े हों लेकिन इसे केंद्र सरकार बनाम दिल्ली सरकार या भाजपा बनाम आम आदमी पार्टी कहना ठीक नहीं है.

Coronavirus In India Live Updates News In Hindi Covid19 May 21 Day ...

वो कहते हैं, ”कोरोना का संकट सारी दुनिया में है. दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों में भी है लेकिन वहां ऐसी बातें नहीं होतीं. कई राज्यों में स्थिति ख़राब है. अगर यह कहा जा रहा है कि केजरीवाल सरकार हालात संभालने में नाकाम रही है और केंद्र सरकार के दखल से सब ठीक हो रहा है तो ग़लत होगा. केंद्र में भाजपा की सरकार है. लेकिन भाजपा शासित राज्यों का क्या हाल है वो किसी से छुपा नहीं है.””गुजरात की स्थिति देख सकते हैं. वहां भी स्थिति गंभीर है

विधायक  सौरभ भारद्वाज कहते हैं कि दोनों सरकारों के बीच थोड़े मतभेद होते हैं कभी कभी लेकिन अगर सारी दुनिया में कोविड की बात करें तो हर जहां वहां के राष्ट्र प्रमुख ही जवाबदेह माने जाते हैं लेकिन भारत में राज्यवार आंकड़े देखे जा रहे हैं और राज्यों पर सवाल उठाए जा रहे हैं

मानवता के लिए राजनीतिक पार्टी लड़ाई बंद  करें ————-   

 

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