नेपाली ज़मीन पर चीनी नियंत्रण की रिपोर्ट से भारत की बढ़ी टेंशन

पिछले छह वर्षों से मोदी भाजपा और आर एस .एस केवल झूठः के आडंवर से देश को चला रहा है ,मोदी सरकार सभी क्षेत्रों में विफल रही है !जहाँ एक ओर आर्थिक क्षेत्रमें भारत बहुत ही नीचे पायदान में चला गया है जिसके कारण देश में बेरोजगारी तथा गरीबी बहुत ही तेजी से बढ़ रही है ,इसके साथ -साथ कोरोना में गलत लाकडाउन के फैसले से सभी क्षेत्रों में भयंकर आर्थिक  नुकशान      हुआहै जिसके कारण करोङों मजदूरों भूखे पेट जीने के लिए मजबूर हो गये और अब कोरोना मरीजों की संख्या पाँच लाख हो गया तब लाकडाउनको खोल कर मोदी सरकार आमलोगों को भगवन भरोसे छोड़  दिया है        और अब कोरोना की मौत संख्या में काफी बढोत्तरी हो रहा है! इस समय भारत माता नादान मोदी सरकार से भारत की सीमा  छोटा हो रहा है और भारत की सीमा पूरी तरह असुरक्षित हो गया है !

इस समबंधमें देश का लब्ध प्रतिष्ठत समाचार -पत्र इकॉनमिक टाइम्स में लिखा है कि भारत और चीन के बीच जब लद्दाख़ सीमा पर तनाव जारी है तभी चीन के नेपाली ज़मीन पर ‘कब्जा’ करने की ख़बरें सामने आई हैं. ऐसे में भारत सरकार इस समय ये आकलन कर रही है कि चीन के इस क़दम के रणनीतिक असर क्या होंगे.
भारत सरकार उस जगह को समझने की कोशिश रही है कि जहां चीन ने नेपाली ज़मीन को अपने नियंत्रण में लिया है और उस जगह की भारतीय सीमा से कितनी दूरी है.

नेपाल

इकॉनमिक टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़, भारत ये भी समझने की कोशिश कर रहा है कि चीन ने ये ज़मीन नेपाल के राजनीतिक नेतृत्व की मर्जी से ली है या फिर ओली सरकार को धता बताते हुए ये ज़मीन हथिया ली है.
अख़बार ने लिखा है कि ऐसे समय जब चीन की रणनीति अपने पड़ोसी देशों की ज़मीन पर अतिक्रमण करते हुए सुरक्षा से जुड़ीं चुनौतियां पैदा करना है, तब चीन का ये क़दम भारत-चीनी रिश्तों में और जटिलता ला सकता है.

अख़बार के अनुसार, ”नेपाल से जुड़े मामलों को समझने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि अब वो समय आ गया है जब नेपाली राजनीतिक नेतृत्व विशेष रूप से ओली को ये समझना चाहिए कि चीन के साथ क़रीबी फायदेमंद नहीं है. इन विशेषज्ञों के मुताबिक़, ओली अपनी कुर्सी बचाने की ख़ातिर चीन के साथ जिस तरह क़रीबी रिश्तों को जी रहे हैं, उससे भारत-नेपाल रिश्तों पर गंभीर असर पड़ा है.”इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल-भारत-चीन के बीच एक ट्राइ-जंक्शन बॉर्डर प्वॉइंट है. साल 1954 में भारत और चीन दोनों ने मानसरोवर कैलाश की यात्रा करने वालों को लिपुलेख पास से होकर गुज़रने की इजाज़त दी थी.इसके बाद 1950 में तिब्बत पर चीनी नियंत्रण के बाद नेपाल ने भारत को इसकी उत्तरी सीमा पर 17 सैन्य चेक पॉइंट लगाने की इजाज़त दी.साल 2015 में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साझा बयान में लिपुलेख को चाइना-इंडिया बॉर्डर पास के रूप में दर्ज किया गया है जहां से दोनों देशों के बीच व्यापार करने को लेकर सहमति बनी.

Indian Army To Be Downsized By 27,000 Soldiers With Aim To Cap ...

इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, ”नेपाल सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन नेपाली ज़मीन पर कब्जा करने के लिए तिब्बत में सड़क निर्माण का सहारा ले रहा है और वह इस क्षेत्र में बॉर्डर आउटपोस्ट बना सकता है.”
अख़बार लिखता है, ”नेपाली कृषि मंत्रालय के सर्वे डिपार्टमेंट की रिपोर्ट 11 जगहों की सूची के बारे में बताती है जिसमें से 10 पर चीन ने कब्जा कर लिया है. चीन ने नदियों के बहाव को मोड़कर, जो कि प्राकृतिक सीमाओं की तरह काम करती हैं, इस ज़मीन पर कब्जा किया है.”
अख़बार ने दस्तावेज़ के हवाले से लिखा है, ”इस दस्तावेज़ के मुताबिक़, चीन तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में रोड नेटवर्क को बेहद तेजी से बढ़ा रहा है जिसकी वजह से कई नदियों और उनकी सहायक नदियों का रास्ता बदल गया है, इस वजह से ये नदियां अब नेपाल की ओर बह रही हैं. इस तरह इन नदियों का बहाव धीरे धीरे नेपाली सीमा को घटा रहा है. अगर ऐसा ही कुछ और समय के लिए चलता रहा तो नेपाल की एक बड़ा भूभाग तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में शामिल हो जाएगा.”
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार तिब्बत में सड़क निर्माण के चलते संखुवासभा ज़िले की समजंग, काम खोला, और अरुण नदियों का बहाव भी बदल गया है जिससे 9 हेक्टेयर की नेपाली भूमि पर चीनी अतिक्रमण हो गया है.
इस दस्तावेज़ में ये भी कहा गया है कि अगर नेपाल ने समय रहते क़दम नहीं उठाए तो उसे एक बड़े भूभाग से हाथ धोना पड़ सकता है.
नेपाल विशेषज्ञों की मानें तो चीन तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और नेपाल के बीच एक बफ़र ज़ोन बनाना चाहता है जिससे तिब्बत आंदोलन को दबाया जा सकते.
अख़बार ने लिखा है, ”नेपाल सरकार के दस्तावेज़ के मुताबिक़ अगर नदियों की वजह से ज़मीन कम होना जारी रही तो सैकड़ों हेक्टेयर ज़मीन प्राकृतिक रूप से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में चली जाएगी. इस बात की बहुत संभावना है कि एक अंतराल के बाद चीन इन क्षेत्रों में अपनी सशस्त्र पुलिस टुकड़ियों के साथ बॉर्डर ऑब्ज़रवेशन पोस्ट बना दे.”
साल 1960 के सर्वे और चीन के साथ अपनी सीमा के बीच खंबे खड़े करने के बाद से नेपाल ने अपनी सीमा को सुरक्षित करने की दिशा में कोई क़दम नहीं उठाए हैं. चीन के साथ उत्तरी सीमा पर कुल 100 खंबे लगाए गए थी. वहीं, भारत के साथ लगाए गए खंबों की संख्या 8,533 है.
ऑस्ट्रेलिया को छोड़कर चीन के अन्य पड़ोसियों ने हाल के दिनों में चीनी आक्रामकता का सामना किया है.
चीन इस समय दक्षिण चीन सागर में वियतनाम और मलेशिया से टकरा रहा है. चीन ने ताइवान पर ताइवान स्ट्रेट में रात के समय ड्रिल करने का दबाव बनाया है.
वहीं, ऑस्ट्रेलिया पर चीन ने वाइन, बीफ़, जौ और चीनी छात्रों पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है.
चीन ने हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे पर भी एक नया सिक्यॉरिटी क़ानून बनाया है जिससे अर्ध-स्वायत्त शहर में तमाम विरोध के बावजूद नियंत्रण को बढ़ाया जा सके.

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