झारखण्ड स्वास्थ्य विभाग में अरबों रुपये के घोटाले

  अरुण कुमार चौधरी
Dead body missing from RIMS ranchi | रांची: RIMS ...

रघुवर के राज में झारखण्ड के गरीब जनता का पैसे दोनों हाथ से लूटा है इस लूट में खुले आम रघुवर के पत्नी ,उसका तीन साला एवं बड़ा बेटा के साथ -साथ रघुवर के प्रेस सलाहकार अजय कुमार तथा उसके सचिव सुनील बरनवाल प्रमुख है ,ये लोग दलाल से सीधे पैसे लेते थे ! इसी कड़ी में डेंटल कॉलेज में करोड़ों का घोटाला उजागर हुआ! इस सम्बन्ध में जानकारी मिली है किराज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में बड़ा घाेटाला सामने अाया है। रिम्स के अफसराें ने बाजार में 4 लाख में मिलने वाली एडवांस डेंटल चेयर 54.10 लाख में ताे 40-45 लाख की माेबाइल वैन 1.95 कराेड़ रुपए में खरीदी। करीब 200 प्रकार की अन्य मशीनें भी बाजार दर से तीन-चार गुना कीमत पर खरीदी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग की अाेर से निदेशक फाइनेंस (एनएचएम) की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी की रिपाेर्ट में यह खुलासा हुअा है। कमेटी ने बुधवार काे स्वास्थ्य सचिव काे यह रिपाेर्ट साैंपी है।

टेंडर मैनेज करने के लिए फर्जी कागजातों का सहारा
रिपाेर्ट में कहा गया है कि टेंडर मैनेज करने के लिए षड्यंत्र किया गया। फर्जी कागजाताें का सहारा लिया गया। इसमें रिम्स के तकनीकी अाैर परचेज कमेटी के सदस्याें की मिलीभगत हाे सकती है। क्याेंकि अधिकतर उपकरण बाजार दर से अधिक कीमत हाेने के बावजूद मेसर्स श्रीनाथ इंजीनियरिंग से खरीदे गए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठित की गई जांच कमेटी ने इस घाेटाले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की अनुशंसा की है। जांच कमेटी में अवर सचिव सुधीर कुमार वर्मा, अवर सचिव नंद किशोर मिश्र, उपनिदेशक डॉ. विजय नाथ खन्ना और निवर्तमान स्वास्थ्य उप सचिव अखौरी शशांक सिन्हा शामिल हैं।

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रिम्स ने डेंटल कालेज के लिए 02 जून 2015 को टेंडर (संख्या 3422) निकाला था। कमेटी ने जांच में पाया कि जिस मशीन की खरीद में श्रीनाथ इंजीनियरिंग और डीके मेडिकल ने टेंडर भरा, उसका दर बाजार दर से काफी अधिक है। जबकि जिस मशीन के लिए दूसरी कंपनियां एल वन हुई, उसका दर बाजार दर के अासपास है। कमेटी ने यह भी पाया कि किसी मशीन के लिए जहां तीन या तीन से ज्यादा कंपनियां सफल हुई हैं, वहां पर जो कंपनी एल वन हुई, उसका दर और श्रीनाथ इंजीनियरिंग और डीके मेडिकल के दर में काफी अंतर है। जिस मशीन के लिए श्रीनाथ इंजीनयिरिंग सफल हुई है, वहां डीके मेडिकल और उसके दर में काफी कम अंतर है। ऐसा इसलिए किया गया कि यह सामान्य लगे।

मशीन               कंपनी और दर          कंपनी और दर                                    कंपनी और                                                                                                                     दर
डेंटल चेयर    डीके 57.50 लाख        श्रीनाथ 54.10 लाख                                 ……
अोरल एक्सरे  विशाल 2.50 लाख   डीके 7.10 लाख                      श्रीनाथ 6.03                                                                                                             लाख
अारवीजी डीके     9.70 लाख             श्रीनाथ 9.84 लाख                                                                                                                                                                                                                                                                                  …….
पैनासोनिक एक्सरे डीके 55.00 लाख  श्रीनाथ 50.59 लाख                   …….
मोबाइल वैन डीके 2.05 करोड़           श्रीनाथ 1.95 करोड़                                                                                                                                                       …….
सर्जिकल
माइक्रोमीटर   विशाल 2.43लाख   डीके20.00 लाख                 श्रीनाथ 17.15                                                                                                                        लाख
कॉस्टिंग मशीन विशाल 16.50 लाख  कैलाश 16.20 लाख                     …….

रिपाेर्ट के मुताबिक, रिम्स अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं ने टेंडर मैनेज के लिए डमी कंपनी खड़ी की। मेसर्स श्रीनाथ इंजीनियरिंग और मेसर्स डीके मेडिकल कोलकाता की कंपनी है। दोनों का पता अाैर निदेशक भी एक हैं। डीके मेडिकल ने आपूर्ति के लिए निर्माता कंपनियों का फर्जी ऑथोराइजेशन लेटर लगाया, ताकि तकनीकी रूप से सफल हो जाए। दोनों फर्मों में हमेशा श्रीनाथ इंजीनियरिंग को ही ऑर्डर मिला, क्योंकि डीके का ऑथोराइजेशन फर्जी था। अगर डीके मेडिकल को टेंडर मिल भी जाता तो उसे यह पूरा नहीं कर पाता। श्रीनाथ इंजीनियरिंग का रेट डीके से थोड़ा कम रखा जाता था।

पूर्व CM रघुवर दास के प्रधान सचिव रहे ...

कमेटी ने पाया कि बिना तत्काल जरूरत के 60 डेंटल चेयर खरीदी गईं। इसी तरह अारवीजी, पैनारोमिक एक्स-रे, ओरल एक्सरे, बोन प्लानटिंग भी खरीदे गए। जाे डेंटल माेबाइल वैन खरीदी गई, वह टैम्पाे ट्रैवलर गाड़ी है। इसका फैब्रिकेशन कर दाे डेंटल चेयर लगाई गई।
टेंडर में शामिल कंपनियों के तकनीकी मूल्यांकन के लिए टेक्निकल कमेटी रिम्स अधीक्षक की अध्यक्षता में है। कमेटी से पास होने के बाद परचेज कमेटी फाइनेंशियल बीड का मूल्यांकन करती है। कमेटी ने दोनों कमेटी के सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल उठाया है।
उपकरणों की खरीद (डेंटल चेयर, मेडिकल मोबाइल वैन आदि) में हुई गड़बड़ी की लोकायुक्त ने भी जांच शुरू कर दी है। लोकायुक्त ने रिम्स निदेशक को समन जारी कर खरीद से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। लोकायुक्त ने चार जनवरी को रिम्स निदेशक को खुद या अपने अधिकारी के माध्यम से कागजात उपलब्ध कराने को कहा था। चार जनवरी को कागजात अधूरे होने के कारण अब लोकायुक्त ने सात जनवरी को सभी संबंधित कागजात उपलब्ध कराने को कहा है। लोकायुक्त ने कहा कि इससे पहले भी 16 नवंबर 2018 को कागजात उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा गया था। कागजात नहीं मिलने कारण यह समन जारी किया गया है। बताते चलें कि रिम्स डेंटल कॉलेज में मशीनों और कलर डॉप्लर मशीन की खरीद की जांच स्वास्थ विभाग की टीम भी कर रही है।
एक दंत चिकित्सक ने बताया कि डेंटल कॉलेज के जितने विभाग हैं, उसकी ओपीडी में आनेवाले मरीजों का इलाज तीन से चार डेंटल चेयर पर ही किया जाता है. अन्य चेयर का उपयोग तक नहीं किया जाता है. जांच टीम ने कहा है कि डीसीआइ की जानकारी के बिना भी डेंटल चेयर की खरीदारी की गयी.अब और भी परत खुलने वाला है

 

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सम्बन्ध मेंझामुमो ने कहा है कि रघुवर दास अपने सरकार में संगठित लूट का सिस्टम बना कर गये थे. अधिकारियों को लगा कि वही सिस्टम जारी है. अब झारखंडियों का हक लूटनेवालों की जांच होगी और जेल जायेंगे. झामुमो ट्विटर हैंडल से पार्टी ने भाजपा पर पलटवार किया है. भाजपा में सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे. इधर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी पार्टी की ओर से जारी बयान को रीट्वीट किया.
पार्टी प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि लूट-खसोट के सारे मामले सामने आ रहे हैं. जांच हो रही है. भ्रष्ट लोगों की जगह होटवार जेल में होगी. हेमंत सोरेन के सरकार में यह सब चलनेवाला नहीं है. रघुवर दास के शासन काल में प्रदेश को खोखला किया गया. पिछले सरकार के कार्यकाल में भाजपा नेता, मंत्री, बिचौलिये, ठेकेदार व भ्रष्ट अधिकारियों का विकास हुआ. रघुवर सरकार के विकास के यही चार मॉडल थे. एक-एक कर सारे मामले खुल रहे हैं, तो भाजपा बौखला रही है. सीएजी की रिपोर्ट सामने आ रही है. पिछली सरकार में कैसे शासन चल रहा था. प्रदेश की जनता देख-समझ रही है.

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श्री भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में सभी तरह के लूट को सामने लाया जायेगा. सभी तरह के भ्रष्टाचार की जांच करा कर जिम्मेदार व्यक्ति, चाहे वह कोई भी हो, पर उचित कानूनी कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि महालेखाकार के रिम्स स्थित डेंटल कॉलेज के नाम मात्र तीन उपकरणों की फोकस जांच में भ्रष्टाचार के मामले उजागर हुए हैं.
श्री भट्टाचार्य ने कहा कि पिछले पांच वर्ष तक भ्रष्टाचार मुक्त बेदाग सरकार चलाने का दावा करनेवाले तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की पोल महालेखाकार की जांच में खुल गयी है. यह जांच बताने के लिए काफी है कि पिछले पांच वर्षों में
स्वास्थ्य विभाग में अरबों रुपये के घोटाले हुए हैं. पिछले पांच वर्षों में डबल इंजन की सरकार स्पीड से लाखों करोड़ों रुपये के गबन में व्यस्त रही. आज एक संस्थान में यदि इस प्रकार की लूट हुई है, तो सहज ही समझा जा सकता है कि राज्य के सभी विभागों में तत्कालीन मुख्यमंत्री के संरक्षण में किस प्रकार की लूट मची होगी.

 

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