बाबा रामदेव के कोरोनिल की झूठ का पर्दाफाश !

अरुण कुमार चौधरी

आज रामदेव बाबा के कोरोना की दवाई की झूठ की सरेआम चर्चा होरही है इससे सम्बंधित सारी बातों प्रस्तुत कर रहा हूँ !

एक ओर जहां देश में कोरोना की दवा को लेकर तमाम चर्चाएं चल रही हैं। वहीं इसी बीच बाबा रामदेव ने इसकी दवा कोरोनिल को बनाने का दावा कर सभी को चौंका दिया है, लेकिन अब उनका यही दावा उन्हें लगातार मुश्किलों में डालता नजर आ रहा है। दरअसल पतंजलि की ओर से मंगलवार को दवा लॉन्च करने के बाद से ही बाबा रामदेव विवादों के घेरे में घिरते नजर आने लगे हैं।

Maharashtra Government On Patanjali Corona Medicine Coronil ...

योगगुरु बाबा रामदेव  ने मंगलवार को कोरोनावायरस  महामारी के बीच पतंजलि ने कोरोना आयुर्वेदिक किट  लॉन्च की. पतंजलि  का दावा है कि क्लीनिकल ट्रायल के दौरान 100 प्रतिशत नतीजे दिखाए पड़े हैं. पंतजलि का दावा है कि इससे सात दिन में 100 प्रतिशत कोरोना मरीज ठीक हुए हैं. पतंजलि के संस्थापक योगगुरु रामदेव ने कहा कि दवा का नाम ‘कोरोनिल और श्वासरि’ है. इसे देशभर में 280 मरीजों पर ट्रायल और रिसर्च करके विकसित किया गया है. हालांकि COVID-19 के किसी भी वैकल्पिक इलाज का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, यहां तक कि कई देशों द्वारा टीकों का परीक्षण किया जा रहा है.

Rajasthan Coronavirus Updates | Health Miniser Raghu Sharma, Says ...

राजस्थान    के आयुष तथा चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने गुरुवार को पतंजलि की कोरोनिल दवा को लेकर कहा कि आयुर्वेद प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में से एक है, जो कि रोग प्रतिरोधात्मक क्षमताओं को बढ़ाने में कारगर है। इसे इम्यून बूस्टर तो कहा जा सकता है लेकिन इसे दवा मानना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भारत समेत दुनिया के तमाम देश कोरोना की दवा के बनाने में लगे हुए हैं, जब तक आईसीएमआर किसी दवा को अनुमति नहीं देता तब तक उसे बाजार में उतारना जायज नहीं होगा। मंत्री ने कहा,  कोरोना जैसी महामारी की रोकथाम के लिए आयुर्वेद विभाग द्वारा प्रदेश भर में आमजन की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता) बढ़ाने के लिए 18 लाख से ज्यादा लोगों को काढ़ा वितरित किया जा चुका है और यह प्रक्रिया निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि सरकार आयुर्वेद पद्धति को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद विभाग द्वारा प्रदेश में 13 मार्च से 24 जून तक 95 हजार से ज्यादा जगहों पर 18 लाख 84 हजार 41 लोगों को काढ़ा वितरित किया जा चुका है। इसके साथ ही 4 लाख 91 हजार से ज्यादा कोरोना ड्यूटी पर गए लोगों और उनके परिजनों को भी काढ़ा बांटा गया है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से हौम्योपैथी व यूनानी चिकित्सा पद्धति के द्वारा भी लोगों को कोरोना से लड़ने के लिए इम्यूनिटी बूस्टर दिए जा रहे हैं। अब तक 1 लाख 35 हजार 632 लोगों को यूनानी जोसांदा व 93 हजार लोगों को कपूरधारा वटी भी बांटी गई हैं। आयुष तथा चिकित्सा मंत्री ने कहा कि मई माह में आयुर्वेद विभाग द्वारा प्रदेश में गिलोय रोपण अभियान ‘अमृता‘ भी चलाया गया, जिसके तहत 4 माह में 1.50 लाख गिलोय पौधे लगाए जा रहे हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि किसी भी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम ठीक है तो 14 दिनों में आइसोलेशन के बाद व्यक्ति स्वतः ही ठीक हो सकता है। उन्होंन कहा कि आयुष मंत्रालय के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार कॉस्मेटिक एक्ट के अनुसार 9 बिंदुओं के आधार पर ही क्लिनिकल ट्रायल कर सकता है
उधर, इस कोरोना आयुर्वेदिक किट को लेकर आयुष मंत्रालय की ओर से प्रतिक्रिया आई है. आयुष मंत्रालय ने संज्ञान लेते हुए कहा कि उसे पतंजलि की इस दवा के बारे में किसी तरह की साइंटफिक स्टडी की सूचना नही है.
इतना ही नहीं मंत्रालय ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से कोविड की दवा की कम्पोजिशन, रिसर्च स्‍टडी और सैम्पल साइज समेत तमाम जानकारी मांगी है. वहीं उत्तराखंड सरकार के सम्बंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी से इस प्रोडक्ट की अप्रूवल की कॉपी भी मांगी गई है. साथ ही आयुष मंत्रालय ने पतंजलि ग्रुप से परीक्षण होने तक इस दवा के प्रचार-प्रसार न करने को कहा।
तोमर की निम्स यूनिवर्सिटी की ओर से सीटीआरआई से औषधियों के ईम्यूनिटी टेस्टिंग के लिए 20 मई को परमिशन ली गई थी। दो दिन बाद ही यानी 23 मई से ही ट्रायल शुरू कर दिया गया। एक महीने तक चले इस ट्रायल के बाद ही 23 जून को योग गुरु रामदेव के साथ मिलकर कोरोना की दवा का ऐलान कर दिया गया। तोमर का अब कहना है कि हमारे ट्रायल की फाइंडिंग को आए अभी 2 ही दिन हुए थे कि योग गुरु रामदेव ने दवा बनाने का दावा कर दिया। उन्होंने कहा कि यह तो वो ही बता सकते हैं कि दो दिन में उन्होंने दवा कैसे बनाई है। मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।

आयुष मंत्रालय की मंजूरी के बिना कोरोना वायरस की दवा इजाद करने के आरोप में अहियापुर निवासी तमन्ना हाशमी ने बुधवार को सीजेएम कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया है। इसमें पतंजलि विवि व शोध संस्थान के संयोजक स्वामी रामदेव व पतंजलि संस्थान के अध्यक्ष आचार्य बालकृष्ण को नामजद किया है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए 30 जून की तिथि निर्धारित की है। वादी ने आरोप लगाया कि दोनों ने कोरोना की दवा का इजाद किया। जबकि भारत सरकार की आयुष मंत्रालय ने दवा के प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी।

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मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में समाजसेवी और भिखनपुरा निवासी तमन्ना हाशमी ने एक परिवाद पत्र दायर कर पतंजलि विश्वविद्यालय एवं शोध संस्थान के संयोजक स्वामी रामदेव तथा पतंजलि संस्था के चेयरमैन आचार्य बालकृष्ण पर आरोप लगाया है कि इन दोनों ने कोरोना वायरस दवा बनाने का दावा कर देश को धोखा दिया है।
परिवाद पत्र में कहा गया है कि बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दवा ‘कोरोनिल टैबलेट’ का ईजाद करने का दावा किया है, आयुष मंत्रालय ने इस पर प्रश्न उठाते हुए इस दवा के प्रचार प्रसार पर रोक लगा दी है।
परिवाद पत्र में कहा गया है कि ऐसा करना ना केवल साजिश के तहत आयुष मंत्रालय को धोखा देना है, बल्कि देश को भी धोखा देना है। इससे लाखों लोगों का भविष्य खतरे में पड़ गया हैपरिवादपत्र में बाबा रामेदव और बालकृष्ण को आईपीसी की धारा 420, 120बी, 270, 504/34 के तहत आरोपी बनाया गया है।तमन्ना हाशमी ने बताया कि अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 3० जून की तारीख मुकर्रर की है

उपरोक्त बातों से पाठक गण स्वयं विचारे कि रामदेव कितना बड़ा झूठा, व्यापारी और मक्कार है या सचमुच एक समाजसेवक है

 

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