बाबा रामदेव  का कोरोना की दवाई अप्रमाणिक और भ्रामक

अरुण कुमार चौधरी

इस कोरोना संकट में बहुत लोग जनता को लूट ने के लिए तरह -तरह के हथकंडे अपना रहे है ऐसी में से स्वामी रामदेव हैं रामदेव रामकृष्ण यादव भारतीय योग-गुरु हैं, जिन्हें अधिकांश लोग स्वामी रामदेव के नाम से जानते हैं।रामदेव ऐसे महत्वाकांक्षी लोग हमारे देश में अपना प्रचार- प्रसार करने के लिए भारतीय योग-गुरु ,(जैसे इसके पहले भारत में योगा था ही नहीं )स्वामी,बापू आदि – आदि अपना नाम के पहले रख लेते हैं और तब अपना धंघा शुरू कर देते हैं! बाबा रामदेव ने 1995 में दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की। 2003 से आस्था टीवी ने हर सुबह बाबा रामदेव का योग का कार्यक्रम दिखाना शुरू किया जिसके बाद बहुत से समर्थक उनसे जुड़े।, उनके प्रवचन विभिन्न टी० वी० चैनलों जैसे आस्था टीवी, आस्था इण्टरनेशनल, जी-नेटवर्क, सहारा-वन तथा इण्डिया टी०वी० पर प्रसारित होते हैं।इसने मिडिया को विज्ञापन दे कर अपने कब्जे में कर रामदेव ने लोगों की भावना को भड़का कर अभी तक करोड़ों रुपए कमा रहे हैं !
इस समय पूरी तरह से रामदेव का पोल खुल गया है, जिसके कारण पतंजलि का धीरे-धीरे भट्ठा बैठते जा रहा है ! इसने राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार पर अपना प्रभाव डाल कर देश के विभिन्न जगहों में कौड़ी के भाव में जमीन लिया है और यह अपना कारोबार कर रहा है ,जो सरकार इस इसके गलत कार्यों में सहयोग नहीं करता है, उसे रामदेव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बदनाम करने की साजिश करता है !पिछले 2012 13 में यूपीए सरकार ने रामदेव के काले कारनामों को यूपीए के खिलाफ में धरना प्रदर्शन किया था रामदेव ने जब २७ फ़रवरी २०११ को रामलीला मैदान में जनसभा की थी उस जनसभा में स्वामी अग्निवेश के साथ-साथ अन्ना हजारे भी पहुँचे थे। इसके बाद दिल्ली के जन्तर मन्तर पर ५ अप्रैल २०११ से अन्ना हजारे सत्याग्रह के साथ आमरण अनशन की घोषणा की जिसमें एक दिन के लिये बाबा रामदेव भी शामिल हुए। बाबा रामदेव ने ४ जून २०११ से दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन के साथ सत्याग्रह की घोषणा कर दी। ४ जून २०११ को प्रात: सात बजे सत्याग्रह प्रारम्भ हुआ।

As Modi and his Hindu base rise, so too does a yoga tycoon

रात को बाबा रामदेव पांडल में बने विशालकाय मंच पर अपने सहयोगियों के साथ सो रहे थे चीख-पुकार सुनकर वे मंच से नीचे कूद पड़े और भीड़ में घुस गये ,यह रहा रामदेव काघिनौना नाटक! भारत में भ्रष्टाचार और इटली एवं स्विट्ज़रलैण्ड के बैंकों में जमा लगभग ४०० लाख करोड़ रुपये के “काले धन” को स्वदेश वापस लाने की माँग करते हुए बाबा ने पूरे भारत की एक लाख किलोमीटर की यात्रा भी की। लोगों को काले धन पर मूर्ख बनाया था ! उस समय रामदेव को काले धन की आड़ में मनमोहन सिंह की सरकर को बदनाम करना था ! आज यही व्यक्ति 6 वर्षों से काले धन की चर्चा नहीं करता , अगर प्रेस वाले कोई काले धन का प्रश्न पूछते हैं तो वह टालमटोल कर आगे बढ़ जाता है क्योंकि इसका उद्देश्य सिर्फ अपना उल्लू सीधा करना था!

Baba Ramdev On Me Too Bollywood Is Full Of Immorality - #MeToo ...

 

इस   समय कोरोना संकट में रामदेव ने इतने गरीब मजदूरों को पेट भरने में सहयोग किया है,जबाब मिलेगा बड़ा शून्य !
रामदेव केवल एक व्यापारी है और वह केवल हर समय पैसा बनाने में लगा रहता है ! कोरोना को लेकर लोगों में भय के बातावरण में रामदेव मालोमाल होना चाहता है
इस संबंध में पतंजलि के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आचार्य बालकृष्ण ने शनिवार को कहा कि अब हम यह कह सकते हैं कि COVID-19 के मरीजों को आयुर्वेद के जरिये भी ठीक कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि हमारी दवाओं को लेने के बाद 5 से 14 दिनों में कोविड-19 के मरीज ठीक हो जा रहे हैं और टेस्ट में उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब हम क्लिनिकल ट्रायल कर रहे हैं और आगामी 4 से 5 दिनों के अंदर इसकी रिपोर्ट और आंकड़ों को पेश करेंगे.

Ramdev reacts to Deepika Padukone’s JNU row

पतंजलि ने दावा किया है कि उन्होंने कोरोना वायरस की दवाई तैयार कर ली है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि आयुर्वेदिक दवाई तैयार की गई है, और अभी तक इसको जिन लोगों पर ट्रायल के तौर पर इस्तेमाल किया गया वो ठीक हुए हैं। पंतजलि के सीईओ आचार्य बालकृष्ण ने कहा है कि पांच से 14 दिन के भीतर इस दवाई से कोरोना के मरीज रिकवर हो रहे हैं।
आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि कोरोना वायरस इस वक्त भयानक स्थिति में है. जबसे कोरोना वायरस का पता चला है, तभी से पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों की टीम इसकी दवा खोजने में जुट गयी थी. उन्होंने कहा कि गिलोय, तुलसी, अश्वगंधा के साथ ही कई तरह के रसों द्वारा दवायी बनायी गयी इस दवा का प्रयोग कई हजार कोरोना पॉजिटिव लोगों पर किया गया है. उन्हें ट्रैक किया गया और यह पाया गया कि वे सभी लोग ठीक हो गये
बताते चलें कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने और इसके मरीजों के इलाज की दवा तैयार करने में दुनियाभर की कई कंपनियां लगी हुई हैं. इसमें भारत में सन फार्मा सहित करीब आधा दर्जन से अधिक कंपनियां क्लिनिकल ट्रायल के स्तर तक पहुंच गयी हैं. इन कंपनियों में से कई ने यह दावा भी किया है कि कोविड-19 की यह दवा 2021 से पहले बाजार में उपलब्ध नहीं हो सकेगी !

Baba Ramdev in hospital? Yes, but that image is from 2011 ...

इस लिए पतंजलि का कोरोना के दवाई की बात    अप्रमाणिक और     भ्रामक  है

आम लोगों की प्रतिक्रिया —————

Mahakanishk Budhvihar यह बाबा रामदेव नहीं बाबा हराम देव है जिस दवाई को पूरी दुनिया बनाने में लगी हुई है और जिसका क्लिनिकल ट्रायल लगभग 2 वर्ष का है और इसने 3 महीने में ही बना ली इसके खिलाफ 420 का मुकदमा दर्ज होना चाहिए यह लोगों को बेवकूफ बनाकर अपनी नकली दवा लोगों तक पहुंचाना चाहता है लोग तो बेगर दवा के भी गरम पानी और देसी काड़ा पीकर ही ठीक हो रहे हैं

Prem Narayana यह भारतीय जनता पार्टी का कारखाना है। यह काले धन के पैसे से खड़ा किया गया है। नहीं तो इतनी जल्दी इतनी बड़ी कंपनी नहीं खड़ी हो सकती है।

Arjundev Pachar खुद एमस में इलाज करवाते है दुनिया को उल्लू बना रहे यह वापारी बाबा हैं कुछ भी दावा कर सकता है

Raghav Kumar .6 वर्षो मे बेरोजगारी 45 साल मे सबसे ज्यादा हो गयी , तो बोला (पकौड़ा) बनाओ, अर्थव्यवस्था लगभग आईसीयू मे पहुच गयी है, अगर भारतीय जुमला पार्टी को 70 साल दिया होता तो आज पकौड़ा यूनिवर्सिटी के साथ कड़ाई और चम्मच 🥄हमारा राष्ट्रीय बर्तन हो सकता था और नेपाल जैसा देश अर्थव्यवस्था मे हमसे आगे होता और जितने भी मैं भी चौकीदार थे नेपाल मे जाकर चौकीदारी कर रहे होते,,

Rajendra Singh ज्यादातर डाक्टरस के अपने हित स्वार्थ होते हैं और वे ऐलोपेथी के सिवाये प्रत्येक पद्यति का विरोध करते हैं और किसी भी बिमारी के लिये CURE शब्द उनकी डिक्सनरी में नही है जबकि आयुर्वेद में ये सम्भव है ।ड़ाक्टर लोग अक्सर चीर फाड़ में ही भरोसा करते हैं ।और ये भारतीय आयुर्वेद के विरुध ऐक साजिस के अलावा कुछ नही हैं ।जिन बडी बडी कम्पनीज की बात की जा रही है who को भी पैसे के बल पर प्रभावित करने की बाते पढ़ने को मिलती रहती हैं ।निचोड ये है कि ऐसी सोच नकारात्मकता को प्रदर्शित करती है 

Rajendradutt Dixit कोई भी दावा करे, किन्तु तथ्य यही है कि बिना आई सी एम आर की स्वीकृति के किसी दवा को वैधानिक स्वीकृति व प्रयोग की अनुमति नही मिल सकती ,तो यदि बाबा दावा कर रहे है तो उन्हें भी यह स्वीकृति लेना होगी ,ऐसी बत्तीस कम्पनियां दवाबनाने का दावा कर रही है 

Subhash Katty Japo बाबा रामदेव ने कूदकर बता दिया है वह मौके का फायदा उठाना चाहता है मगर अगर सबूतों से ही काम करें तो शायद विषय में पूरा छा जाए नगर जैसे हिंदुस्तान को बेवकूफ बनाया है वैसे ही पूरा विषय बेवकूफ नहीं बनेगा जितनी मर्जी कोशिश कर ले भारत में मरीज मुफ्त में मिलते हैं कोई मरे जिए हर आदमी ट्रेल करना चाहता है और चाहता है भारत में ऐसा हो भी रहा है अगर रामदेव जी छा जाए तो अच्छी बात है दवाई मिल जाए इससे बड़ी बात क्या हो सकती है मगर पहले भी कैंसर और अन्य चीजों का इलाज का दावा कर चुके हैं बेवकूफ हो की तरफ फेल हो चुकी है हां सरकार का साथ उनके साथ है कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता यह बात सच्ची

Furkan Malik वहीं बाबा जी फोन पसंद को आज तक से हटवा दिए थे यही बाबाजी सलवार पहन के रामलीला मैदान से भाग गए थे यही बाबा जी पुत्र वर्धक दवा भी बनाए थे बाद में बोले यह ऐसा नहीं होता है बाबा जी कुछ भी कर सकते हैं

Hanuman Prasad Pipraliya क्यों नोटकी कर रहा है भाई सलवारी बाबा खुद का इलाज विदेश से करवाया है लाकडाऊन में आटे की किमत दुगुनी कर दैश के लोगों के साथ लूट मचाई थी भाई सब लूटनै मैं लगै है गरीबों के खून पसीने की कमाई का आनंद ले रहे हैं भाई सावधान

Dheeraj Pal ढोंगीयो का सरदार बाबा हरामदेव
लगत है मूत्र पीकर भी सफल नही रहा तो इस बार नजदीकी कुछ टराई किया होगा
हर जगह अपनी टाग घुसेडना इसकी आदत है छोडो इसे

Raghvendra Singh का रे तुम्हें आधा ग्लास ख़ाली हाई दिखे का, कोई पैसे ले के छाप देगा, का तुम्हीं मीडीएटर था का बे। पतंजलि कुछ बोला तो उसका कुछ प्रमाण तो है तभी बोला, तुम्हारी बातों में कुछ तो साज़िश की बू आ रही, लग तो रहा,

Nafees Baig दुनिया में भारत ऐसा देश है जहाँ अंधविश्वास ज्यादा है जब राम रहीम, आसाराम के बनाये गये दवा कङरों लोग खरीद सकते हैं, वहां बाबा रामदेव, जो बहुत ही चतुर चालाक इन्सान है जब अपनी दो रूपये की दवा दो सौ में बेचले रहा है,और जिसका संरक्षण केंद्र सर्कार कर रही हो वह कुछ भी कर सकता है, जब गौमूत्र सौ रूपये लीटर बेच सकता है और लोग पी भी रहे हैं, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं के करोना के नाम पर फिर यह कङरों रूपया इस देश वासियों से ढग न ले,बाबा रामदेव बनिया है, परिस्तिथि भांप गया, सभी लोग परेशान हैं, तो जाल में फंसेंगे ही, यहाँ के लोग अंधभक्त ज्यादा हैं, और कोई नेता भी जरूर आ जायेंगे इस दवा के प्रचार में, उनका सिर्फ जेब गर्म हो जानी चाहिए ।

Kuldeep Singh जब इस नेपाली को दिल का दौरा पड़ा था तो इसने अपना इलाज AIMS में करवाया था। झुठा और पाखंडी है यह।

Gurdeep Jolly दुनिया मे हजारो से लाखों मोतें होने लगी।
यह पाखंडी अभी भी पाखंड चला रहे है।

Pradip Sinha दावा गलत है या सही आप तो ढूढ़ते रह जाओगे लेकिन इस बीच महाशय करोड़ों का वारा नियारा कर लेगें। इन्होंने दवा का क्लिनिकल टेस्ट कहां कहां और कितना किया, ह्यूमन टेस्ट किस लैब में किया दस्तावेज और सर्टिफिकेट जरूर होगें, दरवजनिक करें।

Manoj Kumar आपका पूरा विमर्श के सेट पैटर्न पर विकसित हुयी मानसिकता के द्वारा प्रस्तुत है, जिसके अनुसार किया गया शोध वैज्ञानिक कहा जाता है जबकि उसके इतर सब कुछ अंधविश्वास ठहराया जाता है जबकि ज्ञान अनुभव का विषय है मशीन का नहीं, विज्ञान उन्हीं तत्वों को जानता है अथवा जान सकता है जो प्रस्तुत है जिसे उस के अनुसार शोद्ध कहते हैं जबकि संसार में सदा से उसके अतिरिक्त भी असंख्य चीजें रही हैं तो क्या यदि वो आधुनिक विज्ञान के पैमाने पर अब तक साबित नहीं हो सका है तो उसका अस्तित्व ही नकार दिया जाए, ये मानसिकता कहीं न कहीं मानव और उसके अनुभव को विज्ञान का गुलाम बनाता है जिसका प्रतिफल भी मानव जाति भुगत रहा है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति से पूर्व क्या मनुष्य में बीमारी नहीं होती थी, क्या वो स्वस्थ्य नहीं होते थे ? आपके विमर्श के अनुसार तो इस संसार में मानवजाति का ही विनाश हो गया होता क्योंकि आपका विज्ञान तो आया ही 200-300 वर्ष पूर्व है, और ये पृथ्वी और इस पर मनुष्य की काल गणना अभी तक निश्चित तौर पर आपका विज्ञान कर नहीं सका है। दूसरी बात यदि आपको अपने वैज्ञानिक तौर तरीके पर इतना ही भरोसा है तो निष्प्राण शरीर में प्राण के स्रोत भी निकाल लेने चाहिए थे अब तक। आप केवल उसी को दवाई दे कर ठीक कर सकते हैं जो जिंदा है जिसमें प्राण है, परन्तु प्राण शक्ति के महत्व का आपके वैज्ञानिक सोंच में कहीं स्थान ही नहीं है जबकि आयुर्वेद औषधियों के प्राण शक्ति से चेतन के प्राण शक्ति की चिकित्सा विधि है एक उन्नत किस्म का विज्ञान जिसे जड़ वादी विज्ञान से वस्तुतः प्रमाणिकता का सर्टिफिकेट प्राप्त करने की आवश्यकता ही नहीं है। क्योंकि स्वयं से कन्फ्यूज़्ड मस्तिष्क की कन्फ्यूज्ड ज्ञान है यह। प्रोटीन के लिए दाल खाएंगे, कैल्शियम के लिए दूध लेकिन अश्वगंधा और गिलोय से मर्ज ठीक हो जाएगा ये नहीं मानेंगे। आग्रह है कि अपने बुद्धि और अनुभव का प्रयोग मानवता के हित में करने हेतु कुएं से बाहर निकलने की हिम्मत जुटाएं तथाकथिक आधुनिक वैज्ञानिक।

रामदेव अब झूठ मत बोले————————

                                                 निवेदन
ऐसे तो हजारों पाठकों का भरपूर सहयोग मिल रहा है, जिसके कारण हम अपनी सच्ची पत्रकारिता को आगे बढ़ा रहे हैं !इसी क्रम में प्रबुद्ध पाठकों से आग्रह है कि हम    आलेख    को प्रस्तुत करता हूं,! इसमें कुछ त्रुटियां हो सकती है, जिसे आप हमें समय-समय पर अवगत करा सकते हैं और आपका सुझाव मेरे लिए बहुत ही मूल्यवान होगा!
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