जब-तक समोसे में आलू रहेगा, तब तक बिहार में लालू रहेगा

अरुण कुमार चौधरी

ऐसे तो बिहार में विभूतियों की लम्बी सूचीहै , परन्तु राजनीति को समझ रखने बाले का कहना है कि बिहार केसरी स्व. डा.श्री कृष्ण सिंह के बाद अगर बिहार का कोई नेता हुआ है तो वह लालू प्रसाद यादव!आज लालू प्रसाद यादव 73 साल के हो गए हैं। इस मौके पर उन्हें लगातार बधाइयां दी जा रही हैं और उनके दीर्घायु और स्वस्थ होने की कामना की जा रही है।

Lalu Yadav to get Rs 10,000 per month under 'JP Senani Samman ...

लेकिन  सबसे ज्यादा उस बयान पर हुआ था जब लालू यादव ने कहा था कि जब-तक समोसे में आलू रहेगा, तब तक बिहार में लालू रहेगा।इस बात की चर्चा आज भी बिहार के जन मानस में छाया हुआ है , जोकि साबित हो गया की विगत तीस बर्षों से बिहार की राजनीती लालू के इर्द-गिर्द में घूम रहा हैअपनी बात कहने का लालू यादव का खास अन्दाज है। बिहार की सड़कों को हेमा मालिनी के गालों की तरह बनाने का वादा हो या रेलवे में कुल्हड़ की शुरुआत, लालू यादव हमेशा ही सुर्खियों में रहे। इन्टरनेट पर लालू यादव के लतीफों का दौर भी खूब चला।

लालू यादव ने 1970 में पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (पुसू) के महासचिव के रूप में छात्र राजनीति में प्रवेश किया और 1973 में अपने अध्यक्ष बने। 1974 में, उन्होंने बिहार आंदोलन, जयप्रकाश नारायण (जेपी) की अगुवाई वाली छात्र आंदोलन में बढ़ोतरी, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ शामिल हो गए।

jaiprakash narayan Archives – The Kachcha Chittha

पुसू ने बिहार छात्र संघर्ष समिति का गठन किया था, जिसने लालू प्रसाद को राष्ट्रपति के रूप में आंदोलन दिया था। आंदोलन के दौरान प्रसाद जनवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता के करीब आए और 1977 में लोकसभा चुनाव में छपरा से जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामित हुए, बिहार राज्य के तत्कालीन राष्ट्रपति जनता पार्टी और बिहार के नेता सत्येंद्र नारायण सिन्हा ने उनके लिए प्रचार किया।। जनता पार्टी ने भारत के इतिहास में पहली गैर-कांग्रेस सरकार बनाई और 29 साल की उम्र में, वह उस समय भारतीय संसद के सबसे युवा सदस्यों में से एक बन गए। उन्होंने सफलतापूर्वक 1980 में बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा और बिहार विधान सभा के सदस्य बने। 1985 में वह बिहार विधानसभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए थे। बिहार के पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर की मृत्यु के बाद लालू प्रसाद यादव 1989 में विपक्षी बिहार विधानसभा के नेता बन गए। इसले अलावा लालू यादव 1990 में वे बिहार के मुख्यमंत्री बने और 1995 में भी भारी बहुमत से विजयी रहे। 1997 में लालू यादव ने जनता दल से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल के नाम से नयी पार्टी बना ली।

लालू यादवों का विवादों से भी काफी नाता रहा है

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लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह दिखा।लालू प्रसाद यादव के 73 वें जन्मदिन के अवसर पर रिम्स परिसर में लालू किचन में तैयारी जोरों पर दिखी। यहां सोशल डिस्टेंस सिंह का पालन करते हुए 73 पौंड का केक भी गरीबों के बीच काटा गया। साथ ही साथ गरीबों के लिए पूड़ी, खीर, सब्जी और बुंदिया बांटे गए।

इस मौके पर तेजस्वी यादव ने कहा कि  मुझे गर्व है कि बिहार के लोगों के हक़ के लिए उनकी इस लड़ाई में मैं भी भागीदर बना हूं। आज उनके जन्मदिन पर में यह प्रण लेता हूं कि बिहार के युवाओं और गरीबों को हर हालत में न्याय दिला कर रहूंगा।नीतीश सरकार ने 15 साल राज करते-करते बहुत ठीकरा फोड़ लिया दूसरों पर। अब और नहीं होने दूंगा, भुखमरी से, अपराध से, अव्यवस्था से, अन्याय से अब जान नहीं खोने दूंगा। आज पिता जी के 73वें जन्मदिन पर हम कम से कम 73000 गरीबों को खाना खिलाएंगे, उनके माथे से चिंता हटाएंगे और फिर पिता की प्रेरणा से ही बिहार को इस कठिन समय से निजात दिलाएंगे।

राबड़ी देवी ने लालू यादव को जन्मदिन की बधाई दी है।राबड़ी देवी ने  कहि कि    साज़िशकर्ताओं ने जेल तो भगवान श्रीकृष्ण को भी भेज दिया था। आप स्वस्थ रहें और गरीबों के सम्मान व अधिकार के लिए यूं ही लड़ते रहें। यही एक परम प्रार्थना है यही एक दिली दुआ है।

लालू जिए हजारों साल———————

 

                                                    निवेदन
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