आदिवासियों के सरना धर्म कोड को अविलंब लागू करें

एजाज आलम
हजारीबागःआदिवासियों के सरना धर्म कोड को अविलंब लागू करने एवं विधान सभा सत्र में इस मुद्दे को लाने के लिए एवं सरकार का  इस ओर ध्यान आकर्षण के लिए पूरे राज्य स्तर एवं जिला स्तर पर  कार्यक्रम के लिए भिन्न-भिन्न संगठनों के माध्यम से आंदोलन का शुभारंभ किया गया। 2021 की जनगणना में  आदिवासियों को अलग धर्मकोड दिया जाए उक्त बातें  सरना   समिति के अध्यक्ष महेंद्र बेक ने कही
केंद्रीय सरना समिति के सचिव विमल बिरवा ने कहा कि  यदि 2021 के जनगणना में सरना धर्म कोड लागू नहीं किया गया तो जनगणना का विरोध किया जाएगा  क्योंकि इससे आदिवासियों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा आदिवासियों का अस्तित्व बचाने के लिए  चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जाएगा। यंगब्लड आदिवासी समाज एवं ऑल संथाल स्टूडेंट यूनियन के केंद्रीय मांझी हड़ाम ने कहा आदिवासियों ने बहुत लंबे समय से अपनी पहचान व आस्तित्व  को बचाने के लिए सरना धर्म कोड की मांग की जा रही है और कोई भी सरकार  इन्हें ना आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान कर पा रही है ना सामाजिक रूप से कम से कम धार्मिक रूप  की जो पहचान है वह तो प्रदान कर दें इसी से समाज खुश रहेगा
सरकार आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड जल्द से जल्द लागू करें। सरना प्रार्थना सभा के पहन बबन तिग्गा ने कहा यदि सरकार इस विधानसभा सत्र में सरना धर्म कोड का बिल पारित करके आगे नहीं भेजती है तो जनगणना का विरोध की जाएगी अधिकारियों को सहयोग नहीं करने की बात कही
जनगणना कॉलम  में हमारी पहचान को बनाए रखना है दुर्भाग्यवश साजिश के तहत काफी लंबे समय से इस प्रक्रिया को सरकार के द्वारा अपनाई जा रही है काफी लंबे समय से मांग को उठाई जा रही है अगर सरकार हमारी मांगों को नहीं मानती है तो आंदोलन चरणबद्ध तरीके से करना है  गीता कुजूर ,राजश्री  उरांव श्याम   सरना प्रार्थना सभा गुरु बसंत कुजूर सरना प्रार्थना सभा पुरवा हजारीबाग उर्मिला पांडे, सीमा तिर्की, लीलावती देवी , आदिवासी केंद्रीय  सरना समिति के विमल बिरवा, जीत वाहन भगत, बंधन एक्का, रतन केरकेट्टा  सतन उराव , दिलीप धान की ओर से  मनोज टुडू सुनील लाकड़ा, मनोज एक्का मौजूद थे।
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