एनटीपीसी में भूमि के मुआवजा को लेकर अंबा प्रसाद और जयंत सिन्हा आमने-सामने

विशेष संवाददाता द्वारा

हजारीबाग : पिछले कई महीनों से बड़कागांव विधायक अंबा प्रसाद एनटीपीसी में भूमि का मुआवजा, घर का मुआवजा एवं पेंशन के लिए आवाज उठा रही है और अब इसी को लेकर बड़कागांव विधायक अंबा प्रसाद और हजारीबाग सांसद श्री जसवंत सिन्हा आमने-सामने हो गए! दोनों एक दूसरे पर जनता की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं इस संबंध में बड़कागांव विधायक अंबा प्रसाद ने कहा है कि बड़कागांव विस्थापन से संबंधित मुख्यमंत्री की ओर से की गयी घोषणा पर विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि भूमि का मुआवजा, घर का मुआवजा एवं पेंशन की घोषणा से मैं पूरी तरह संतुष्ट नहीं हूं. क्षेत्र का सबसे मुख्य मुद्दा रोजगार है.इन्होंनें आगे कहा कि जनता के प्रोत्साहन से मुझे जनहित के कार्य करने का हौसला मिलता है. परंतु स्थानीय सांसद जयंत सिन्हा यहां की जनता के विरुद्ध काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि एनटीपीसी केंद्र के अधीन आता है. अगर सांसद केंद्र सरकार से एनटीपीसी पर दबाव दिलवाते तो जनता को इतना संघर्ष नहीं करना पड़ता.क्षेत्र में मुआवजे और रोजगार को लेकर आज तक सांसद की ओर से कोई पहल नहीं की गयी है. इसके उलट उन्होंने एनटीपीसी मुख्यालय को केंद्र से दबाव देकर विस्थापित एवं प्रभावितों को जायज मुआवजा एवं रोजगार देने से मना करवा दिया.ताकि मुझे और राज्य सरकार को इसका श्रेय न मिल पाये. साथ ही अपने कार्यकर्ताओं को मेरे खिलाफ दुष्प्रचार में लगा दिया है. मैं इस कार्य से विचलित नहीं होनेवाली हूं. एनटीपीसी पर जनता के विरुद्ध दबाव का पुख्ता प्रमाण समय आने पर दूंगी और जनता के न्यायालय में उन्हें खड़ा करूंगी.

Duty alterations for Make in India to increase competitiveness, not protectionism: Jayant Sinha | Business Standard Newsदूसरी ओर हजारीबाग सांसद जयंत सिन्हा ने बड़कागांव विधायक अंबा प्रसाद की ओर से लगाये गये आरोप को आधारहीन बताया है. उन्होंने कहा कि मैं इस पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता हूं. मैं जनता का वक्ता हूं. जनहित में काम करता हूं. जनता की अनुकूल मांगों और उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया है और करता रहूंगा
इस समय एनटीपीसी का भूमि का मुआवजा, घर का मुआवजा एवं पेंशन एक राजनीतिक सियासी का विवाद हो गया ह। दोनों पार्टियां अपने-अपने लाभ और नुकसान के लिए एक दूसरे पर आरोप लगा है परंतु एनटीपीसी के समस्त विस्थापितों का सम्मानजनक मुआवजा और रोजगार नहीं मिल रहा है

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