हेमंत सोरेन का चारो ओर जय -जयकार

अरुण कुमार चौधरी

आज पूरे झारखंड में हेमंत सोरेन को माटी का बेटा, गरीब मजदूरों का दुख हरने वाला भाई ,तथा बीमार लोगों के लिए एक संभल है। इस समय पूरे विश्व में कोरोना वायरस महामारी फैला हुआ है, और इसी बीमारी से झारखंड राज भी प्रभावित है !इस समय यहां हेमंत सोरेन के नेतृत्व में पूरी सूझबूझ के साथ सरकार कोरोना को हराने के लिए दिन -रात काम कर रही है! इस बड़ी विषम परिस्थिति में झारखंड का बेटा बड़ी ही कोमल और एकाग्रता से होकर एकलव्य निकला हुआ है!
इसलिए आम जनता हर चौक- चौराहे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भूरी-भूरी          प्रशंसा  कर रहा है !इस समय झारखंड में हेमंत सोरेन अपने व्यवहार से राजनीतिक प्रतिद्वंदी   को भी कायल कर दिया हैं, जिसका जीता जागता उदाहरण अभी दो-तीन दिन पहले हुआ है, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश को बड़ी ही सीभीयर हार्ट अटैक हुआ था, परंतु हेमंत सोरेन ने सारी राजनीतिक बातों को पीछे छोड़कर एक मानवता का मिसाल कायम किया है, हेमंत सोरेन ने अपने रिम्स के डॉक्टरों को निर्देश दिया कि दीपक प्रकाश का इलाज ठीक ढंग से होना चाहिए और ये जल्दी से जल्दी स्वस्थ होकर अपना घर चले जाएं और यही हुआ कि दीपक प्रकाश शनिवार को ही स्वस्थ होकर घर चले आए!
जब से हेमंत सोरेन सत्ता संभाले हैं तब से ही उन्होंने अपनी गरीबों तथा बीमार लोगों की इलाज की प्रथम प्राथमिकता दिया है ,इसी के संदर्भ में जब केंद्रीय सरकार का निर्णय हुआ कि अब प्रवासी मजदूर तथा फंसे हुए बीमार लाचार लोग के लिए ट्रेनों से जाने की अनुमति प्रदान हो गई, तब से ही सोरेन ने अपने व्यक्तिगत एवं कठोर मेहनत कर  केंद्रीय मंत्रियों से बात कर ट्रेन चलाकर अपने प्रवासी मजदूरों, बीमार   लोगों को घर ला रहे हैं, पिछले दिनों वेल्लौर से १२०० बीमार झारखंडी तथा प्रवासी मजदूर को लाया गया, तो हटिया पहुंचने पर लोगों ने हेमंत सोरेन जिंदाबाद का नारा लगाया और लोगों ने मुक्त कंठ से हेमंत सोरेन की दीर्घायु की कामना किया! इसका विवरण निम्न है,वेल्लोर (काटपाड़ी) से श्रमिक स्पेशल ट्रेन आज 8 मई 2020 को हटिया स्टेशन पहुंची. इस स्पेशल ट्रेन से 1200 से ज्यादा यात्री राजधानी रांची पहुंचे, जिनमें प्रवासी मजदूर और मरीज शामिल थे हटिया स्टेशन पहुंचने पर सभी यात्रियों का गुलाब का फूल देकर स्वागत किया गया. स्पेशल ट्रेन से वेल्लोर से हटिया पहुंचे लोगों में मरीज भी थे. इन मरीजों की सुविधा के लिए रांची जिला प्रशासन की ओर से एंबुलेंस की व्यवस्था की गयी थी. साथ ही वैसे मरीज जो चल पाने में असमर्थ थे, उनके लिए व्हीलचेयर का भी इंतजाम किया गया था. जिला प्रशासन द्वारा प्रतिनियुक्त किये गये वॉलिंटियर्स ऐसे मरीजों को व्हीलचेयर के माध्यम से एंबुलेंस तक पहुंचा रहे थे.

बसों से मजदूरों को संबंधित जिले के लिए किया गया रवाना
स्पेशल ट्रेन से हटिया पहुंचे प्रवासी मजदूरों को अपने घर भेजने के लिए रांची जिला प्रशासन द्वारा बसों की भी व्यवस्था की गयी थी. वापस लौटे प्रवासी मजदूरों की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें संबंधित जिले के बसों में बैठाकर उनके घरों के लिए रवाना किया गया. प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा 57 बसों की व्यवस्था की गयी थी.
——–लोगों ने कहा बहुत अच्छी व्यवस्था है
श्रमिक स्पेशल ट्रेन से वेल्लोर से हटिया पहुंचे लोगों ने जिला प्रशासन रांची द्वारा स्टेशन पर तरह की कोई समस्या नहीं, हमें वापस लाने के लिए जो व्यवस्था की गयी उसके लिए हम. उन्होंने सरकार का धन्यवाद देते हुए कहा कि हमें किसी तरह की कोई समस्या नहीं, हमें वापस लाने के लिए जो व्यवस्था की गयी उसके लिए हम आभारी हैं

किसानों को आर्थिक मदद
इस समय लोगों का कहना है कि हेमंत सोरेन कई किरदार के रूप में अभिनय कर रहे हैं, जो जिसके कारण झारखंड की जनता के दिल में बसते जा रहे हैं !कई लोगों ने तो हेमंत सोरेन को एक धैर्यवान और परिश्रमी नेता मानते हैं
इसके साथ साथ हेमंत सोरेन ने किसानों के लिए तथा प्रवासी मजदूरों के लिए कई कार्यक्रम की भी घोषणा की है कोरोना संकट की इस घड़ी में अब किसानों को आर्थिक मदद मिलेगी। झारखंड सरकार किसानों को सहयोग राशि के रूप में दस हजार रुपए देने जा रही है। राज्य के करीब 35 लाख किसानों को इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ छूटे हुए सभी दूध उत्पादकों से भी सरकार दूध खरीदेगी। इस सहयोग के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से 3900 करोड़ का विशेष पैकेज मांगा है। सरकार ने इस संबंध में केंद्र को प्रस्ताव भी भेजा है। कृषि मंत्री बादल बताते हैं कि लॉकडाउन में सबसे अधिक नुकसान किसानों को हुआ है। इस नुकसान से निकलने के लिए सिर्फ योजनाओं से काम नहीं चलेगा। सबसे पहले ऐसे किसानों को विशेष पैकेज के तहत आर्थिक सहयोग राशि देनी होगी। केंद्र को इस संबंध में पहले ही वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है, जिसे केंद्र ने गंभीरता से भी लिया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों को हर संभव मदद पहुंचा रही है लेकिन उन्हें केंद्र सरकार से भी मदद की पूरी उम्मीद है।
कोरोना महामारी के बीच किसानों को अधिक लाभ मिल सके इसे लेकर विभाग ने सभी पीड़ित किसानों की सूची बनाने की तैयारी में है। मंत्री ने बताया कि झारखंड पिछड़ा राज्य है और कोविड-19 बीमारी के बाद यहां विशेष पैकेज की जरूरत है। लॉकडाउन की अवधि में ही ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में आज भी किसानों की सड़ी सब्जियां देखी जा सकती हैं। इस बीच सरकार उन्हें आपदा से मुआवजा भी दे रही है। लेकिन इन सब से किसानों का आत्मविश्वास टूटने से बचाने की जरूरत है।

छह माह के लिए दीदी किचन में किसानों की सब्जियां जाएगी

मदद करने के लिए उनके खेतों से अगले छह माह के लिए दीदी किचन में सब्जियां भेजी जाएगी। राज्य में चल रहे 4500 दीदी किचन के लिए 13.50 करोड़ रुपए की खपत आएगी। प्रत्येक किचन के लिए प्रत्येक दिन तीस हजार रुपए की सब्जी खरीदी जाएगी। मंत्री बादल ने बताया कि इस तरह केंद्र को इस योजना के बारे में भी अवगत कराया गया है। छह माह के लिए इन किचन में 81 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

दूध की बिक्री चलाने की योजना

इसी तरह अभी राज्य में 35 हजार लीटर दूध की बिक्री हो रही है। जबकि आम दिनों 1.30 लाख लीटर दूध की खपत थी। लॉकडाउन में हो रहे नुकसान को देखते हुए दूध उत्पादकों से झारखंड मिल्क फेडरेशन दूध की पूरी खरीदारी करेगा। इसके बदले सरकार फेडरेशन को प्रति माह 12 करोड़ का भुगतान करेगी जो किसानों को दूध के बदले मिल सकेगा। इसे भी छह माह तक चलाने की योजना है, इसके लिए 72 करोड़ रुपए की पैकेज की जरूरत है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को एक बार फिर स्पष्ट किया कि झारखंड में लॉकडाउन में छूट का निर्णय समय, परिस्थिति और संक्रमण की स्थिति पर निर्भर करेगा। समय  आने   पर इसका आकलन करने के बाद ही सरकार इस बारे में निर्णय करेगी कि लॉकडाउन किन क्षेत्रों में किस रूप में कब तक चलेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले भी कहा है कि प्रवासियों के आने के बाद चुनौतियां बढ़ेंगी। संक्रमितों की संख्या में भी थोड़ी वृद्धि हुई है। शासन-प्रशासन का पूरे मामले पर सजग है। आनेवाले प्रवासियों को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचा देने के बाद ही सरकार सिद्दत के साथ सारे विषयों पर निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि      12 मई तक गुजरात, पंजाब, आध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब सहित कई अन्य राज्यों से लोग ट्रेन से आएंगे।
प्रवासियों के आने का सिलसिला कब तक जारी रहेगा के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल आने का ही सवाल नहीं है। झारखंड में फंसे लोगों को उनके गृह राज्य भेजने की भी व्यवस्था करनी है। अब तक 5.5 लाख लोगों ने आने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। झारखंड के नोडल अधिकारियों को यह सूची उपलब्ध करा दी गई है। अब वह दूसरे राज्यों के नोडल अधिकारियों के साथ संपर्क स्थापित कर उन्हें लाने की व्यवस्था कराएंगे। कब तक लाया जाएगा के सवाल पर सीएम ने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर योजनावद्ध तरीके से काम कर रही है।
अब ऐसा लगता है कि हेमंत सोरेन राज्य के एक कर्मवीर नेता के रूप में उभर गए हैं, अभी  हेमंत सोरेन   को मात देने के लिए झारखंड में कोई भी नेता नहीं है

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