नीतीश कुमार की हालत चिंताजनक

अरुण कुमार चौधरी

इस समय बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की हालत बड़ी ही चिंताजनक    हो गई है, क्योंकि  लॉक डाउन के अंतर्गत करीबन बिहार के लाखों प्रवासीमजदूर देश के कई महानगरों और नगरों में फंसे हुए हैं ,इनका हर रोज वीडियो तथा समाचार पत्र  से पता चलता है कि यह लोग बहुत ही मुश्किल में फंसे हुए हैं, वहां पर स्थानीय प्रशासन ठीक ढंग से खाने -पीने की व्यवस्था नहीं कर रहे हैं, जैसा कि हमें समाचार पत्र और वीडियो से पता चला है! बहुत से मजदूरों को 3 दिन में एक बार उन्हें खाना मिल रहा है और वह भी खाना आधा अधूरा ही रहता है, जिसके कारण मजदूर की जिंदगी नर्क से भी बदतर हो गई है, यह लोग अपने घर जाने के लिए करीबन 1 महीने से केंद्र सरकार और बिहार सरकार के मुख्यमंत्री से गुहार लगा रहे हैं, परंतु नो उन्हें रहने और खाने का समुचित व्यवस्था हो रहा है और न जाने का ही कोई व्यवस्था हो रहा है ,इस दरमियान करीबन हजारों मजदूरों ने पैदल, रिक्शा तथा अपने ठेला गाड़ी से गांव की ओर चल पड़े और जिसमें कई लोग रास्ते में ही अपना दम तोड़ दिए और कई लोग घर आते- आते दम तोड़ दिए !उसका एक कारण है कि दिल्ली से बिहार यानी 18-1900 किलोमीटर पैदल तय करना लोगों की बस की बात नहीं है,  उनके पास समुचित खाने पीने की व्यवस्था नहीं  था   तथा रास्ते में भी सारे के सारे दुकान बंद है  इस के साथ -साथ    इन्हें किसी तरह का पोस्टिक आहार नहीं मिल रहा था और गंतव्य स्थान   पहुंचते-पहुंचते कई लोगों मौत के मुंह में चले गए, यह सब  सभ्य   समाज के लिए बहुत ही शर्मनाक बात है परंतु अभी जो देश में राजनीतिक कल्चर है की सभी के सभी,  खासकर सत्ता पार्टी के लोग सुबह से शाम तक अपना झूठ प्रचार और अपनी वाह -वाही का फेक न्यूज़ सोशल मीडिया तथा गोदी मीडिया के द्वारा देते रहते हैं! कोई भी सरकार केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार गरीब जनता के  बारे में कल्याण का सोच  तथा कुछ करने के लिए समय नहीं है या कहिए उनके भीतर कोई गरीबों  के प्रति काम करने का विचार भी नहीं है ,वर्तमान केंद्रीय सरकार केवल मध्यवर्ग तथा उच्चतम मध्य वर्ग एवं बड़े से बड़े अमीर लोगों के बारे में तरह-तरह  के बारे में की बातें करते हैं क्योंकि इन्हें मध्य वर्ग के द्वारा ही थाली पीठना, दीप जलाना तथा सरकार  का   गुणगान करने  से प्रसन्नता    हैं ! और अभी असली यही   मोदी सरकार की जनता  है ,तब  ऐ  क्यों न सोचे बाकी देश की जनता कुछ भी कहे, टर- टर राते रहे, उनका कोई सुनने वाला नहीं है  !बिहार में अभी डबल इंजन की ही सरकार है परंतु बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गया हुआ है !,और पिछले कई दिनों से     बिहार में कोरोना बीमारियों का संख्या में काफी इजाफा होती जा रहा है, जबकि बिहार में  टेस्टिंग बहुत ही कम हो रहा है  इसके बावजूद भी मरीजों       की संख्या में काफी उछाल आया है .जिसके कारण नितीश सरकार सकते में है और वह अपनी मजबूरी के कारण इधर- उधर की बात कर टाइम पास कर रहे हैं! इसके अलाव है इस समय करीबन 8000 बच्चे केवल कोटा में फंसे हुए हैं तथा अन्य कई शहरों में करीब  हजारों बच्चे बिहार के फंसे हुए हैं., इन बच्चों के अभिभावक  की हालत बहुत ही नाजुक है, क्योंकि इनके बच्चे जहां फंसे हुए हैं वहीँ  वह बहुत ही मानसिक तनाव में रह रहे हैं, साथ ही साथ बच्चे की मां भी काफी तनाव में रह रहे! इस संबंध में हमें एक अभिभावक ने कहा कि  ऐसी  स्थिति में  बिहार के मुख्यमंत्री अपनी जिम्मेदारी छोड़कर कन्नी काट रहे हैं   , केवल इधर -उधर की बातें करती है!  नीतीश जी कभी कहते हैं कि छात्रों के खाते में 1000 Rs.डाल दिया है,कभी कहते हैं कि मजदूरों के खाते में 1300Rs दे दिया है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह केवल कोरा  घोषणा है, वास्तविक सतही स्तर पर कोई भी जगह पर किसी भी तरह की सहायता बिहार सरकार के तरफ से नहीं मिल रहा है ! इन सारी कठिनाइयों से जूझते हुए नीतीश कुमार ने अब यह तय कर लिया है कि हम लॉक डाउन के अंतर्गत प्रवासी गरीब मजदूर या छोटे–छोटे फंसे हुए बच्चे को बिहार नहीं ला देंगे! इस संबंध में उन्होंने कल ही प्रधानमंत्री के वीडियो कांफ्रेंस में नीतीश कुमार ने  केंद्र से  आवश्यक निर्देश जारी करने की की मांग की है और   अब नीतीश कुमार अपनी कमजोरी को केंद्र सरकार पर ठीकरा पीट रहे हैं और बहाना पर बहाना लगा रहे हैं, इस नीतीश कुमार के व्यवहार से बिहार में मध्यवर्ग तथा गरीब वर्ग पर नाराज चल रहे हैं और  इस नाराजगी से फायदा उठाने में विपक्ष पूरी तरह से बयान बाजी कर रहे हैं ऐसे इस समय बिहार में कोई चुनावी माहौल नहीं है फिर भी आगामी विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की हालत  पतली होने की संभावना है, क्योंकि नीतीश कुमार पिछले 15 वर्षों में केवल मीडिया का उपयोग किया और अपनी छवि को बनाने  में लगा रहा!  नीतीश   सरकार   के    15 सालों  में स्वास्थ्य व्यवस्था में काफी गिरावट आई है ,क्योंकि इनके हॉस्पिटल में  डॉक्टर ,  नर्स और  दवाई नहीं  है, पूरा का पूरा स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे है, इसलिए भी नीतीश कुमार बाहर से मजदूरों तथा बच्चों को बिहार में लाकर नया सिरदर्द  नहीं  लेना   चाहते हैं!

हम बुद्धिजीवियों,  समाजसेवियों तथा पत्रकारों से आग्रह करते  है कि नीतीश सरकार पर वैचारिक दबाव बना दें, जिससे  लाखों गरीब मजदूरों तथा हजारों छात्रों की कठिनाइयों का समाधान हो सके।

 

 

 

 

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